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मप्र में अतिथि विद्वानों के लिए अलग कैडर बनाने की तैयारी, हरियाणा मॉडल का अध्ययन

मप्र में अतिथि विद्वानों के लिए अलग कैडर बनाने की तैयारी, हरियाणा मॉडल का अध्ययन

प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के आधे से ज्यादा पद अतिथि विद्धानों से भरे हैं। यानी उच्च शिक्षा अतिथि विद्धानों के भरोसे हैं।

मप्र में अतिथि विद्वानों के लिए अलग कैडर बनाने की तैयारी हरियाणा मॉडल का अध्ययन

 अब सरकार अतिथि विद्धानों के लिए अलग कैडर बनाने की तैयारी कर रही है।

इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने विशेषज्ञों की एक सात सदस्यतीय कमेटी बनाई है। जो हरियाणा राज्य के अतिथि विद्धान मॉडल का अध्ययन करेगी। हरियाणा में अतिथि विद्धानों का मानदेय मप्र से डेढ़ गुना ज्यादा है।

वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों के एक प्रदर्शन में प्रत्येक माह एकमुस्त 50 हजार रुपया मानदेय देने की घोषणा की थी, जिसे लागू नहीं किया गया।

उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिस समिति का गठन किया गया है, वह हरियाणा में अतिथि विद्वानों की सेवा शर्तों, सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व से जुड़े बिंदुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देंगी। मप्र उच्च शिक्षा में प्राध्यापकों की नियमित भर्ती कम होने से शिक्षकों की कमी हो गई थी। इसी कमी को पूरा करने के लिए अतिथि विद्धानों का

जबकि हरियाणा में पांच वर्ष का अनुभव रखने वाले यूजीसी पात्र अतिथि विद्वानों को 57,700 रुपये वेतन और सेवानिवृत्ति की आयु तक स्थायित्व प्रदान किया गया है।

सहारा लिया गया। अब पूरी उच्च शिक्षा अतिथि विद्धानों के भरोसे हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने बताया कि किसी भी शासकीय कॉलेज में प्राध्यापकों के कोई पद खाली नहीं है। यह जरूर है कि नियमित प्राध्यापक नहीं है, लेकिन अतिथि विद्धान अध्यापन का काम करा रहे हैं। अतिथि विद्धानों को और ज्यादा सुविधा देने को लेकर विभाग विचार कर रहा है। शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के लिए जन भागीदारी समितियों के जरिये तदर्थ प्राध्यापकों की भर्ती 1990 के दशक में शुरू हुई थी। वर्ष 2000 के बाद इसमें तेजी आई। मध्य प्रदेश में ऐसे अतिथि विद्वानों को 2000 रुपया प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता है।

अवकाश के दिनों का मानदेय नहीं बनने से अतिथि विद्वानों को अधिकतर 40 हजार 44 हजार रुपया प्रतिमाह ही मिल पाता है। उन्हें 13 आकस्मिक अवकाश और तीन ऐच्छिक अवकाश की पात्रता है। अगर रिक्त स्थान पर नियमित भर्ती का प्राध्यापक आ गया तो अतिथि विद्वानों को बिना किसी विकल्प के बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।