Breaking News
  • हमारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ें और हर बड़ी खबर सबसे पहले पाएं।
  • YouTube: @SwadeshNews, Facebook: @DainikSwadesh, Instagram: @swadesh_news1, X: @DainikSwadesh

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश > भोपाल

GMC Bhopal Students Protest Over Scholarship Issue

गांधी मेडिकल कॉलेज में छात्रवृत्ति विवाद, 400 पैरामेडिकल छात्र हड़ताल पर, सतपुड़ा भवन का घेराव

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में छात्रवृत्ति फॉर्म भरने की अनुमति न मिलने पर 400 पैरामेडिकल छात्र आंदोलन पर उतर आए हैं। बुधवार को सतपुड़ा भवन घेराव की चेतावनी दी गई है।


गांधी मेडिकल कॉलेज में छात्रवृत्ति विवाद 400 पैरामेडिकल छात्र हड़ताल पर सतपुड़ा भवन का घेराव

Bhopal News |

भोपाल। राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज जीएमसी में छात्रवृत्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। छात्रवृत्ति फार्म भरने की अनुमति प्रबंधन से नहीं मिल रही है। इस कारण विवाद अब आंदोलन में बदल गया है। करीब 400 पैरामेडिकल छात्र मंगलवार को काम पर नहीं आए, हालांकि अंबेडकर जयंती अवकाश होने से अस्पताल सेवाओं पर ज्यादा असर नहीं दिखा। 

छात्रों ने साफ कह दिया है कि वे ड्यूटी पर नहीं आएंगे और आंदोलन जारी रहेगा। अब छात्र बुधवार को सुबह 11 बजे सतपुड़ा भवन का घेराव करेंगे। उधर कॉलेज के प्रबंधन का कहना है कि यह मामला कॉलेज स्तर का नहीं है, बल्कि पैरामेडिकल काउंसिल के नियमों से जुड़ा है। इस संबंध में विभाग को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं और समाधान की कोशिश जारी है। 

आंदोलन की ये है वजह 

छात्रों ने बताया कि सत्र 2023-24 और 2024-25 के छात्रवृत्ति फॉर्म भरने की अनुमति नहीं मिल रही है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे फीस जमा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया है। परेशान छात्रों ने आज केवल काम बंद रखा है, लेकिन बुधवार को सतपुड़ा भवन का घेराव करने का निर्णय लिया है। छात्रों ने कहा है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। 

अस्पताल सेवाओं पर पड़ेगा असर 

पैरामेडिकल स्टॉफ अस्पताल की जांच और इलाज से जुड़ा होता है। ऐसे में हड़ताल का असर आने वाले दिनों में मरीजों पर पड़ सकता है। जांच रिपोर्ट में देरी, ऑपरेशन में बाधा और पैथोलॉजी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। इससे पहले कल सोमवार को छात्रों ने कॉलेज के एडमिन ब्लॉक के पास प्रदर्शन कर चुके, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने हड़ताल का रास्ता चुना।

Related to this topic: