गंगा एक्सप्रेस-वे से यूपी के 12 जिलों के 500+ गांवों में विकास की रफ्तार तेज होगी। बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे।
उत्तर प्रदेश में बन रहा गंगा एक्सप्रेस-वे सिर्फ एक हाईवे नहीं, बल्कि विकास की ऐसी सड़क है, जो राज्य के 12 जिलों के सैकड़ों गांवों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। लगभग 594 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज तक जाएगा। इसके रास्ते में आने वाले 500 से अधिक गांवों के लिए यह प्रोजेक्ट कनेक्टिविटी, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट के नए अवसर खोल रहा है।
बेहतर कनेक्टिविटी से बदलेंगे हालात
अब तक जिन गांवों को शहरों तक पहुंचने में कई घंटे लग जाते थे, वहां गंगा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। उदाहरण के लिए रायबरेली जिले के हरचंदपुर और बछरावां क्षेत्र के गांव, उन्नाव के सफीपुर क्षेत्र, हरदोई के बिलग्राम इलाके और शाहजहांपुर के तिलहर क्षेत्र के गांव सीधे इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे। इससे इन इलाकों के किसानों, छोटे व्यापारियों और युवाओं को बड़े बाजारों तक आसान पहुंच मिलेगी।
लॉजिस्टिक्स और स्थानीय व्यापार को मिलेगा फायदा
गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे कई जगहों पर लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाने की योजना है। शाहजहांपुर, हरदोई और उन्नाव जैसे जिलों में पहले से ही कृषि और छोटे उद्योगों की अच्छी संभावनाएं हैं। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यहां से फल, सब्जियां, अनाज और डेयरी उत्पाद बड़े शहरों तक तेजी से पहुंच सकेंगे। उदाहरण के तौर पर हरदोई के बिलग्राम क्षेत्र के किसान अब अपनी उपज को लखनऊ, नोएडा और दिल्ली के बाजारों तक कम समय में पहुंचा सकेंगे। इसी तरह उन्नाव के सफीपुर और बांगरमऊ इलाके में वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी नई गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद है।
रियल एस्टेट में आएगी तेजी
किसी भी बड़े एक्सप्रेस-वे के आसपास सबसे पहले जिस क्षेत्र में तेजी आती है, वह रियल एस्टेट है। गंगा एक्सप्रेस-वे के आसपास कई गांवों में जमीन की मांग तेजी से बढ़ रही है। रायबरेली के हरचंदपुर, प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र, शाहजहांपुर के तिलहर और संभल जिले के असमोली क्षेत्र के आसपास रियल एस्टेट डेवलपर्स और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। स्थानीय स्तर पर छोटे होटल, ढाबे, पेट्रोल पंप, गोदाम और ट्रांसपोर्ट कंपनियां भी आने वाले समय में तेजी से विकसित हो सकती हैं। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते
एक्सप्रेस-वे सिर्फ सड़क नहीं बनाता, बल्कि रोजगार की नई श्रृंखला तैयार करता है। निर्माण के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिला है, लेकिन असली अवसर एक्सप्रेस-वे चालू होने के बाद पैदा होंगे। लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, होटल, वेयरहाउसिंग, सर्विस स्टेशन और छोटे व्यापार के जरिए हजारों स्थानीय युवाओं को काम मिलने की संभावना है। प्रयागराज के हंडिया क्षेत्र, उन्नाव और रायबरेली के कई गांवों में युवा अब उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद बड़े शहरों तक फल, सब्जियां और डेयरी उत्पाद तेजी से पहुंच सकेंगे।
तीन प्रमुख खंडों में विभाजित निर्माण कार्य
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मूर्त रूप देने में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समूह ने बदायूं से प्रयागराज तक 464 किलोमीटर (करीब 80%) हिस्से का निर्माण कार्य संभाला है। निर्माण कार्य को तीन प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है:
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बदायूं से हरदोई – 151.7 किमी
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हरदोई से उन्नाव – 155.7 किमी
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उन्नाव से प्रयागराज – 157 किमी
यह एक्सप्रेस-वे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (DBFOT) मॉडल पर आधारित यह परियोजना भारत की सबसे लंबी एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं में से एक है।