शहर की फ्रीगंज रोड स्थित एक निजी अस्पताल में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब डिलीवरी के दौरान कथित चिकित्सीय लापरवाही से महिला की हालत बिगड़ने का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगा
प्रमोद शर्मा, हापुड़: शहर की फ्रीगंज रोड स्थित एक निजी अस्पताल में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब डिलीवरी के दौरान कथित चिकित्सीय लापरवाही से महिला की हालत बिगड़ने का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा कर दिया। गुस्साए परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ऑपरेशन के दौरान महिला की तीन नसें कट गईं, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसकी जान पर बन आई। गंभीर हालत में महिला को नोएडा के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया, जहां वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।
परिजनों का आरोप, काटी तीन नसें
जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर के गुलावठी निवासी नंदिनी की शादी हापुड़ के पटेल नगर निवासी करण सिंघल, पुत्र सुधीर कुमार सिंघल, से हुई थी। नंदिनी गर्भवती थी, जिसके चलते परिजनों ने प्रसव के लिए उसे फ्रीगंज रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के दौरान डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही सामने आई और ऑपरेशन के समय महिला की तीन नसें कट गईं। इससे तेज रक्तस्राव शुरू हो गया और उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
वेंटिलेटर पर महिला
परिजनों का आरोप है कि जब महिला की स्थिति बेहद नाजुक हो गई तो अस्पताल प्रशासन ने उन्हें सही जानकारी देने के बजाय जल्दबाजी में महिला को रेफर कर दिया। आनन-फानन में उसे नोएडा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी हालत अत्यंत गंभीर बताते हुए वेंटिलेटर पर भर्ती कर लिया। चिकित्सकों के अनुसार, महिला की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
परिजनों का भारी हंगामा
घटना की जानकारी मिलते ही महिला के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए और डॉक्टरों तथा अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए हंगामा किया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद परिजनों को शांत कराया। पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी लेकर जांच शुरू कर दी है।
डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग
परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सही उपचार किया जाता और चिकित्सकों द्वारा लापरवाही न बरती जाती तो आज नंदिनी की जान पर संकट नहीं आता। उन्होंने दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उधर, इस घटना के बाद निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से समाचार लिखे जाने तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।