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ई-रिक्शा चालकों की मनमर्जी जारी: न तय किराया, न मीटर, सवारियों की जेब पर डाका

ई-रिक्शा चालकों की मनमर्जी जारी: न तय किराया, न मीटर, सवारियों की जेब पर डाका

ई-रिक्शा चालकों की मनमर्जी जारी न तय किराया न मीटर सवारियों की जेब पर डाका

रायपुर:शहर में ई-रिक्शा रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन बन गया है, लेकिन इनके किराये को लेकर कोई तय सीमा नहीं है। न कोई निर्धारित दर, न मीटर और न ही कोई निगरानी। ऐसे में ई-रिक्शा चालक अपनी मर्जी से सवारियों से किराया वसूल रहे हैं। यह हाल शहर के लगभग हर रूट का है, जहां छोटी दूरी पर भी अलग-अलग दरें बताई जा रही हैं। किसी से 10 तो किसी से 30 रुपए और कई मामलों में 150 से 300 रुपए तक मांगे जा रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों, महिलाओं और सामान्य सवारियों को उठानी पड़ रही है, जिनका रोज़ का बजट बिगड़ने लगा है।

दूरी से ज्यादा चेहरे देखकर किराया तय

चालक अब दूरी के बजाय सवारी की मजबूरी और हालात देखकर कीमतें बताते हैं। ऑफिस जाने वाली महिलाओं से अधिक किराया, बाहर से आए यात्रियों से मनमानी वसूली, छात्रों से “चिल्लर नहीं है” कहकर अतिरिक्त पैसा — ऐसी शिकायतें आम हैं। रात में नशे में ई-रिक्शा चलाने वालों की वजह से परेशानी और बढ़ जाती है। शहर में ई-रिक्शा की बाढ़ तो है, लेकिन किराया तय करने वाला कोई सिस्टम नहीं। जिस ड्राइवर की जो मर्जी, वही किराया।

रेलवे स्टेशन से सुंदर नगर तक 150 से 300 का अंतर

स्टेशन के आसपास पहले से ही मनमानी दरें चलती हैं। मनोहर शर्मा बताते हैं कि उन्हें अपनी पत्नी, बेटी और बेटे के साथ सुंदर नगर जाना था। एक चालक ने 300 रुपए मांगे, दूसरे ने 250 और किसी ने 150 रुपए। तीन चालकों ने तीन अलग-अलग कीमतें बताईं।

अव्यवस्था की 4 बड़ी वजहें

किराया तय करने का कोई सरकारी नियम नहीं

मीटर नहीं, केवल चालक की मौखिक दर

निगरानी करने वाला कोई विभाग सक्रिय नहीं

भीड़ वाले इलाकों में दूसरे शहरों से आए ई-रिक्शा चालक, जिन्हें स्थानीय दरों का ज्ञान नहीं

आमानाका में 15 मिनट में 5 अलग-अलग किराये

राकेश यादव बताते हैं कि वे दोपहर में आमानाका से ई-रिक्शा लेना चाह रहे थे। पंद्रह मिनट में 4-5 रिक्शे मिले— किसी ने 20 कहा, किसी ने 15, किसी ने 30 भी बताया। आखिर में एक चालक 10 रुपए में छोड़ने को तैयार हुआ। इससे साफ है कि शहर में ई-रिक्शा का किराया तय करने का कोई आधार ही नहीं; जितनी मर्जी, उतनी कीमत।

कालीबाड़ी से घड़ी चौक- 30 रुपए

प्रकाश वर्मा ने बताया कि घड़ी चौक से कालीबाड़ी तक 30 रुपए वसूले जा रहे हैं। इतनी छोटी दूरी का यह कितना किराया है? यह दूरी सामान्यतः 10–15 रुपए में तय हो सकती है, लेकिन ड्राइवर अपनी मनमर्जी की दरें तय कर रहे हैं।

पंडरी से लोधीपारा चौक- 50 रुपए

रानी साहू ने बताया कि पंडरी से लोधीपारा जाने के लिए 50 रुपए लिए जा रहे हैं। महंगाई के बीच रोज रिक्शा लेना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रात में भाठागांव बस स्टैंड के आसपास कई नशे में युवक ई-रिक्शा चलाते हैं, जो किराए के बचे पैसे वापस भी नहीं करते।स्टेशन को ड्राइवर हाई-चार्ज जोन मानते हैं, जहां बाहर से आए यात्रियों को देखकर मनमर्जी किराया वसूला जा रहा है।