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दुर्ग गैंगरेप केस: दो आरोपी सरेंडर

दुर्ग गैंगरेप केस में 2 फरार आरोपी सरेंडर, 7 साल शोषण का आरोप

दुर्ग गैंगरेप केस में दो फरार आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर किया, 7 साल तक ब्लैकमेल और शोषण के आरोप।

दुर्ग गैंगरेप केस में 2 फरार आरोपी सरेंडर 7 साल शोषण का आरोप

Group Molestation |

दुर्गः छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला में नाबालिग से गैंगरेप के मामले में फरार चल रहे दो आरोपियों ने आखिरकार कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इनमें से एक बीएन पांडेय बताया जा रहा है, जो दुर्ग सांसद के पूर्व पीए के तौर पर जुड़ा रहा है। दूसरा आरोपी संजय पंडित है। दोनों ने 13 फरवरी को अदालत में आत्मसमर्पण किया। इससे पहले चार अन्य आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी थी। अब इस मामले के सभी छह आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।

बढ़ते दबाव में किया आत्मसमर्पण

पुलिस पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी, जबकि दो आरोपी लगातार फरार थे। उनकी तलाश में पुलिस अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी। जांच का दायरा बढ़ता देख और गिरफ्तारी की आशंका के बीच दोनों ने अदालत पहुंचकर सरेंडर कर दिया।

सात साल तक ब्लैकमेल और शोषण का आरोप

पीड़िता ने महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि बीएन पांडेय ने उसे पीडब्ल्यूडी विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया। इसी दौरान उससे व्हाट्सऐप पर आपत्तिजनक वीडियो मंगवाए गए और वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक दुष्कर्म किया गया।

दूसरे आरोपी संजय पंडित पर भी नौकरी से निकालने का डर दिखाकर शोषण करने का आरोप है। पीड़िता का कहना है कि इस तरह उसे करीब सात साल तक धमकियों और दबाव में रखा गया।

2018 में शुरू हुआ था सिलसिला

बताया गया है कि वर्ष 2018 में 14 साल की नाबालिग अपनी मां के साथ बिलासपुर से दुर्ग आई थी। यहां उसकी मुलाकात पीडब्ल्यूडी विभाग से जुड़े गोविंद सिंह ठाकुर से कराई गई। आरोपी ने सिविल लाइन क्षेत्र स्थित पीडब्ल्यूडी क्वार्टर में मां-बेटी को ठहराया और मां को काम दिलवाया।

आरोप है कि जब मां काम पर जाती थी, तब क्वार्टर में नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया जाता था। बाद में धमकाकर चुप रहने को कहा गया।

लॉकडाउन के बाद फिर शुरू हुआ उत्पीड़न

2020 में लॉकडाउन के दौरान मां-बेटी बिलासपुर लौट गई थीं। कुछ महीनों बाद वे फिर दुर्ग आकर रहने लगीं। पीड़िता ने पढ़ाई भी शुरू की, लेकिन जुलाई 2023 में फिर से उसे नौकरी का झांसा देकर रेस्ट हाउस बुलाया गया। आरोप है कि इसके बाद अलग-अलग जगहों पर उसे बुलाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। फोटो और वीडियो बनाकर उसे डराया जाता रहा।

हालांकि दुर्ग सांसद विजय बघेल ने स्पष्ट किया है कि बीएन पांडेय उनके अधिकृत निजी सहायक नहीं थे, बल्कि विभागीय अटैचमेंट में कार्यरत थे।

2024-25 में भी जारी रहा अत्याचार

पीड़िता के मुताबिक 2024 में कारोबारी के घर और अन्य रेस्ट हाउसों में भी उसके साथ दुष्कर्म किया गया। अगस्त 2024 में कवर्धा और बाद में पाटन के रेस्ट हाउस में भी वारदात दोहराई गई।

अक्टूबर 2025 में इंदिरा मार्केट स्थित एक होटल में मिलने के बहाने बुलाकर फिर से दुष्कर्म करने का आरोप है।

मंगेतर को बताई सच्चाई, फिर दर्ज हुई शिकायत

पीड़िता की शादी तय होने के बाद भी आरोपियों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। शादी तुड़वाने की कोशिशें की गईं। परेशान होकर पीड़िता ने अपने मंगेतर को पूरी बात बताई। मंगेतर के हौसला देने पर उसने महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई।

अब पुलिस सभी आरोपियों से रिमांड लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है, ताकि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा सके।

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