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गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में ओडिशा के हाथियों की मौत और बीमारी की चिंता

गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में ओडिशा के हाथियों की मौत और बीमारी की चिंता

गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में ओडिशा के हाथियों की मौत और बीमारी की चिंता

गरियाबंद: ओडिशा के जंगलों से छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बीमार और घायल हाथी आ रहे हैं। हाल ही में एक बीमार हथिनी की यहां मौत हो गई, जबकि दो और हाथी रिजर्व में दाखिल हुए हैं, जिनमें से एक बीमार है।

वन अधिकारियों का मानना है कि ओडिशा के जंगलों में कीटनाशक और पोटाश बम की चपेट में आने के कारण हाथी अपनी सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ के जंगलों की ओर आ रहे हैं। पिछले सात दिनों से इलाज के दौरान 12 साल की मादा हथिनी की हालत लगातार बिगड़ती रही। वन विभाग की टीम ने दिन-रात उसकी देखभाल की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

हाथियों के लिए पोटाश बम सबसे बड़ा खतरा

वन विभाग के अनुसार, दिसंबर 2024 में भी उदंती-सीतानदी क्षेत्र में पोटाश बम की चपेट में आने से एक हाथी अगहन की मौत हो चुकी है। किसान अक्सर जंगली सूअरों और अन्य जानवरों से फसल बचाने के लिए पोटाश बम का उपयोग करते हैं, लेकिन इसके कारण हाथी जैसे बड़े वन्यजीव भी प्रभावित हो जाते हैं।

बीमार हाथियों की पहचान और इलाज जारी

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि बीमार हाथियों की पहचान कर तुरंत इलाज की व्यवस्था की जा रही है। सीमावर्ती इलाकों में गश्त भी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति को रोका जा सके। मारे गए हथिनी का पोस्टमार्टम किया गया और नमूने बरेली जांच के लिए भेजे गए हैं।

वन विभाग ने सभी हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही है, खासकर उन हाथियों पर जो बीमार या कमजोर हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन प्रयासों से हाथियों की रक्षा और उनके लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।