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सावन शिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में भक्तों का हुजूम, रजत मुकुट चंद्र से बाबा का अलौकिक श्रृंगार

सावन शिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में भक्तों का हुजूम, रजत मुकुट चंद्र से बाबा का अलौकिक श्रृंगार

सावन शिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में भक्तों का हुजूम रजत मुकुट चंद्र से बाबा का अलौकिक श्रृंगार

Crowd of Devotees in Mahakal temple on Sawan Shivratri 2025 : मध्य प्रदेश। आज सावन महीने की शिवरात्रि है। सावन शिवरात्रि 2025 के पावन अवसर पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में भक्तों का उत्साह चरम पर रहा। हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए पहुंचे। रजत मुकुट और चंद्र से सजे बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बना। आइये जानते हैं क्यों महत्त्वपूर्ण हैं सावन शिवरात्रि...।

सावन शिवरात्रि के अवसर पर बाबा का विशेष श्रृंगार

महाकालेश्वर मंदिर में सावन माह की शिवरात्रि के अवसर पर तड़के 3 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। भगवान महाकाल का पहले जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया।

भगवान महाकाल के मस्तक पर बेलपत्र और चंद्र अर्पित कर दिव्य श्रृंगार किया। श्री महाकालेश्वर को भस्म चढ़ाई गई। साथ ही शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित पुष्प से बनी फूलों की माला धारण की। बाबा को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भोले बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया।

सावन शिवरात्रि का महत्व

सावन शिवरात्रि हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित है। यह सावन मास में पड़ने वाली शिवरात्रि है विशेष रूप से भक्तों के लिए आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

सावन शिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

सावन मास को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सावन शिवरात्रि पर भक्त उपवास, पूजा और ध्यान (मेडिटेशन) करते हैं, जो आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक माना जाता है। यह दिन भक्तों को अपने पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रेरित करता है।

पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन मास में समुद्र मंथन के दौरान निकला हलाहल विष भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, जिससे वे नीलकंठ कहलाए। यह माना जाता है कि इस दिन शिवजी और माता पार्वती का मिलन हुआ था, जो इसे और भी पवित्र बनाता है।

सावन शिवरात्रि पर मंदिरों, विशेष रूप से उज्जैन के महाकाल मंदिर जैसे स्थानों पर भक्तों का हुजूम उमड़ता है। इस पवित्र महीने में भक्त कांवड़ यात्रा निकालते हैं और गंगा जल या स्थानीय नदियों का जल शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।

ज्योतिषीय महत्व:

सावन मास में चंद्रमा का प्रभाव बढ़ता है और शिवरात्रि पर चंद्र-शिव का संबंध इसे विशेष बनाता है। ज्योतिष में इस दिन पूजा करने से ग्रह दोषों (विशेष रूप से चंद्र दोष) का निवारण होता है।

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