शिवपुरी के पचावला गांव में मुक्तिधाम की जमीन पर अतिक्रमण के कारण बुजुर्ग का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। बाद में ग्रामीणों के हस्तक्षेप से नदी किनारे अंतिम संस्कार किया गया।
शिवपुरीः जिले के कोलारस जनपद के ग्राम पचावला से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक मुक्तिधाम की जमीन पर अतिक्रमण के कारण एक वृद्ध का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। मृतक के स्वजन शव को सड़क पर छोड़कर जाने की बात कहने लगे। तब गांव वालों के हस्तक्षेप के बाद मृतक की देह को नदी किनारे मुखाग्नि दी गई।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम कोरवास निवासी श्यामलाल जाटव के यहां कोई पुत्र नहीं था। इसलिए वह ग्राम सजाई में अपनी बेटी की ससुराल में रह रहा था। बुजुर्ग का देहांत होने के बाद सजाई गांव में कोई मुक्तिधाम न होने के कारण वह उसकी देह को अंतिम संस्कार के लिए पास के गांव पचावला के मुक्तिधाम पर पहुंचे। वहां पर मुक्तिधाम की जमीन पर अतिक्रमण कर गेहूं की फसल करने वाले किसी ग्रामीण ने रोका। उसने अंतिम संस्कार करने से यह कहते हुए रोक दिया कि अगर वह यहां अंतिम संस्कार करेंगे तो उसकी फसल जल जाएगी।
शव को मुक्तिधाम से वापस लौटवा दिया
इस मामले में मृतक के स्वजनों का कहना था कि यह मुक्तिधाम है, वह यहां अंतिम संस्कार नहीं करेंगे तो फिर कहां करेंगे। इस पर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई और जमीन पर अतिक्रमण करने वाले ग्रामीण ने शव को मुक्तिधाम से वापस लौटवा दिया। इस पर मृतक के स्वजनों ने शव को वापस लाकर सड़क पर रख दिया और वह शव को वहीं छोड़कर जाने लगे तो कुछ ग्रामीणों ने हस्तक्षेप करते हुए नदी के किनारे मृतक का अंतिम संस्कार करवाया।
जमीन पर कुछ ग्रामीणों ने कब्जा किया
पचावला पंचायत के सचिव ब्रजमोहन जाटव ने बताया कि मुक्तिधाम के आसपास की जमीन पर कुछ ग्रामीणों ने कब्जा कर फसल बोई है। उन्होंने कहा कि फसल सूखने की कगार पर है, इसलिए कटाई के बाद अतिक्रमण हटवाया जाएगा। जाटव ने यह भी कहा कि पचावला गांव के लोग आमतौर पर वहीं अंतिम संस्कार करते हैं, लेकिन इस परिवार को किसने रोका, इसकी जांच की जाएगी। वहीं, सजाई पंचायत के सचिव महेश रघुवंशी का कहना है कि सजाई गांव में भी मुक्तिधाम है। इसके बावजूद शव को दूसरे गांव के मुक्तिधाम में क्यों ले जाया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।