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दूषित पानी मामले में CM मोहन का सख्त एक्शन, अपर आयुक्त और PHE इंजीनियर निलंबित, निगम आयुक्त हटा

दूषित पानी मामले में CM मोहन का सख्त एक्शन, अपर आयुक्त और PHE इंजीनियर निलंबित, निगम आयुक्त हटाए

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में सीएम मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्शन लिया है। निगम के दो अधिकारियों को निलंबित करने के बाद निगम आयुक्त को हटाया गया।

दूषित पानी मामले में cm मोहन का सख्त एक्शन अपर आयुक्त और phe इंजीनियर निलंबित निगम आयुक्त हटाए

इंदौरः मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी मामले में 15 लोगों की मौत के बाद से हाहाकार मचा हुआ है। इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्शन लिया है। पहले निगम आयुक्त को कारण बताओं नोटिस दिया था। लेकिन रात के समय उन पर एक्शन लिया है।

सीएम मोहन यादव ने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिये जा रहे हैं। निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। साथ ही इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

उच्च अधिकारियों की बैठक में लिया था एक्शन

इंदौर मामले में शुक्रवार की सुबह मुख्य सचिव और सीनियर अधिकारियों के साथ हुई हाई लेवल मीटिंग में सीएम ने प्रशासनिक सर्जरी करते हुए बड़े अधिकारियों पर गाज गिराई है। सीएम ने स्पष्ट किया था कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।

पहले नोटिस फिर हटाने की कार्रवाई

हाई लेवल मीटिंग के बाद पहले सीएम मोहन ने इंदौर को निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने और अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और पीएचई के प्रभारी इंजीनियर से प्रभार लेने के निर्देश दिए थे। हालांकि रात करीब 9 बजे उन्होंने सोशल मीडिया में पोस्ट करते हुए अपर आयुक्त और पीएचई के प्रभारी इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। साथ ही निगम आयुक्त को हटाने के निर्देश दिए हैं।

इसके अलावा सुबह के आदेश में सीएम ने पहले ही इंदौर नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ति करने के निर्देश भी दिए हैं।

क्या है पूरा मामला

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में प्रारंभिक जांच में पाया गया कि पब्लिक टॉयलेट के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवर का पानी पेयजल में मिल गया था। इसके चलते दूषित पानी लोगों को घरों में पहुंचा। इस घटना के चलते अब तक 15 लोगों की मौत की खबर है। हालांकि हाई कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में ऑफिशियल आंकड़ा 4-10 के बीच बताई है। वहीं, 272 से अधिक लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हुए हैं।

इंदौर के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।

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