छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटों पर लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम निर्विरोध चुनी गईं। भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे चुनाव बिना मतदान के ही तय हो गया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में सोमवार को एक दिलचस्प और शांत चुनावी तस्वीर देखने को मिली। राज्यसभा की दो सीटों के लिए नामांकन के बाद जब अंतिम स्थिति साफ हुई तो दोनों सीटों पर चुनाव की नौबत ही नहीं आई।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की ओर से फूलो देवी नेताम निर्विरोध राज्यसभा सदस्य घोषित कर दी गईं। दोनों दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा, ऐसे में मुकाबला होने से पहले ही परिणाम तय हो गया।
भाजपा और कांग्रेस को मिली एक-एक सीट
छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटें खाली हुई थीं। इन सीटों के लिए एक पर भाजपा और दूसरी पर कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारे थे। जब नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई और किसी अन्य दल या निर्दलीय ने पर्चा दाखिल नहीं किया, तब साफ हो गया कि दोनों उम्मीदवार निर्विरोध चुन ली जाएंगी। इस तरह भाजपा की ओर से लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की ओर से फूलोदेवी नेताम को राज्यसभा भेजने का रास्ता आसान हो गया।
राजनीति में महिला की मजबूत पकड़
भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं। करीब तीस साल से वे संगठन और सार्वजनिक जीवन में काम कर रही हैं। वे रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं और पार्टी में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। वर्तमान में वे राज्य महिला आयोग की सदस्य भी हैं और पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि महिला वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया।
बस्तर क्षेत्र की आदिवासी नेता
कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए फूलोदेवी नेताम पर दोबारा भरोसा जताया था। वे बस्तर क्षेत्र से आने वाली आदिवासी नेता हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं। करीब बत्तीस साल से राजनीति में सक्रिय फूलोदेवी नेताम वर्तमान में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला था, ऐसे में पार्टी ने उन्हें एक बार फिर राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया। जीत के उन्होंने कहा कि उन्हें कभी किसी पद की इच्छा नहीं रही। जब भी संसद में बोलने का मौका मिला, उन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास और आदिवासी समाज के अधिकारों की आवाज उठाई।
इन नामों पर भी हुआ था विचार
कांग्रेस के भीतर राज्यसभा के लिए कुछ अन्य नामों पर भी चर्चा हुई थी। इनमें दीपक बैज, मोहन मार्करम, भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के नाम शामिल बताए जा रहे थे। हालांकि अंत में पार्टी नेतृत्व ने फूलोदेवी नेताम को ही दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला किया।
राजनीतिक संदेश भी देखे जा रहे
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दोनों दलों का एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार न उतारना भी एक संकेत देता है। इससे यह साफ होता है कि कई बार राज्यसभा चुनावों में राजनीतिक सहमति भी बन जाती है। फिलहाल छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दोनों सीटों पर नई पारी शुरू होने जा रही है और अब सबकी नजर इस पर रहेगी कि संसद में ये दोनों नेता प्रदेश के मुद्दों को किस तरह उठाती हैं।