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Chhattisgarh Farmers to Get Loan, Seeds in Village

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ी राहत, अब गांव में ही मिलेगा कर्ज और बीज

छत्तीसगढ़ में 515 नई PACS समितियों का गठन किया गया है। अब किसानों को गांव में ही कर्ज, खाद और बीज जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे खेती आसान होगी।


छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ी राहत अब गांव में ही मिलेगा कर्ज और बीज

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। खेती-किसानी से जुड़े जरूरी काम अब आसान होने वाले हैं। सरकार ने सहकारिता को मजबूत करते हुए गांव स्तर पर सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

515 नई समितियों का गठन

केंद्रीय सहकारिता मंत्री Amit Shah के मार्गदर्शन में राज्य में 515 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) का गठन किया गया है। इन समितियों का वर्चुअल शुभारंभ 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे।

क्या है PACS और क्यों जरूरी

PACS यानी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां गांव स्तर पर काम करने वाली संस्थाएं होती हैं। इन समितियों के जरिए किसानों को कृषि ऋण, खाद, बीज और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। पहले इन सुविधाओं के लिए किसानों को दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा गांव में ही मिल सकेगी।

कार्यक्रम में ये नेता होंगे शामिल

इस कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री केदार कश्यप अध्यक्षता करेंगे। वहीं, सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना स्वागत भाषण देंगे और योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी।

किसानों को सीधे मिलेंगे ये फायदे

नई PACS समितियों से किसानों को कई बड़े लाभ मिलेंगे। इनमें गांव में ही आसानी से मिलेगा कृषि ऋण, खाद और बीज की सुविधा नजदीक उपलब्ध, सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ, समय और खर्च दोनों की बचत, खेती की लागत कम करना और आमदनी बढ़ने की संभावना शामिल है।

‘सहकार से समृद्धि’ की दिशा में पहल

यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सहकार से समृद्धि’ सोच को आगे बढ़ाने का हिस्सा है। इसका उद्देश्य गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। 

कुल समितियों की संख्या बढ़ी

नई 515 समितियों के गठन के बाद छत्तीसगढ़ में PACS की कुल संख्या 2573 हो जाएगी। इनमें पहले से 2058 बहुउद्देशीय समितियां कार्यरत हैं।

गांव की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह पहल किसानों के लिए राहत भरी साबित हो सकती है। यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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