छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में मसाले की खेती का लालच देकर आदिवासी किसानों से अफीम उगवाई गई। पुलिस ने 62 क्विंटल अफीम के पौधे जब्त किए और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया।
सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बलरामपुर जिले के दूरस्थ गांवों में आदिवासी किसानों को मसाले और फूलों की खेती का लालच दिया गया, लेकिन उनके खेतों में उगाई जा रही थी अवैध अफीम। जब प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो खेतों में खड़ी फसल देखकर सब हैरान रह गए। अलग-अलग इलाकों से करीब 62 क्विंटल अफीम के पौधे, फल और तना बरामद हुए हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है।
दुर्गम इलाके में चल रही थी करोड़ों की खेती
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी ब्लॉक के त्रिपुरी और खजूरी गांव का है। यहां पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में सबसे पहले त्रिपुरी गांव से करीब 43 क्विंटल अफीम के पौधे, फल और फूल जब्त किए गए, जिनकी कीमत लगभग 4.75 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके बाद खजूरी गांव के पास पहाड़ी और दुर्गम इलाके से 285 बोरे अफीम के पौधे भी बरामद किए गए। इनका वजन करीब 19 क्विंटल बताया गया है और अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ रुपये है।
यह पूरा इलाका झारखंड की सीमा से सटा हुआ है। दुर्गम होने के कारण यहां आवाजाही भी बहुत कम रहती है। शायद इसी वजह से तस्करों ने इसे सुरक्षित जगह समझकर खेती शुरू कर दी।
मसाले की खेती का झांसा देकर ली जमीन
पुलिस ने इस मामले में दो ग्रामीणों सहादुर नगेशिया और टुईला नगेशिया को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि दोनों को झारखंड के चतरा जिले के रहने वाले भूपेंद्र उरांव ने मसाले की खेती का लालच दिया था। उसी ने गांव के किसानों से जमीन किराए या बंधक पर लेकर अफीम की खेती कराई। पुलिस के मुताबिक इस पूरे मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें जमीन मालिक, मजदूर और एक मध्यस्थ भी शामिल है।
खेती में फायदा नहीं मिल रहा था, इसलिए
गिरफ्तार किसानों का कहना है कि उन्हें यह जानकारी ही नहीं थी कि खेत में अफीम उगाई जा रही है। टुईला नगेशिया के पास खुद की जमीन नहीं थी, उसने गांव के किसान से 6 हजार रुपये में जमीन बंधक पर ली थी। उसी दौरान भूपेंद्र उरांव ने उनसे संपर्क किया और कहा कि मसाले की खेती से अच्छी आमदनी होगी। किसानों के मुताबिक फसल तैयार होने के बाद मुनाफे का हिस्सा देने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला।
खेतों के पास झोपड़ी बनाकर रहते थे मजदूर
खजूरी के तुर्रीपानी इलाके में करीब 1.47 एकड़ जमीन में अफीम की खेती कराई गई थी। फसल की देखभाल के लिए स्थानीय लोगों को काम नहीं दिया गया। झारखंड से आए चार-पांच लोग खेतों के पास झोपड़ी बनाकर रहते थे और फसल की निगरानी करते थे। बताया जा रहा है कि होली के दौरान वे अपने गांव चले गए, तब तक स्थानीय ग्रामीण ही खेतों की देखभाल कर रहे थे। खेतों की सिंचाई पास के प्राकृतिक जल स्रोत से की जाती थी।
सूखे फल और चीरे के निशान से खुला राज
पुलिस को खेतों में कई जगह अफीम के फल पर चीरे के निशान भी मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि वहां से पहले ही अफीम निकाल ली गई थी। कुछ जगहों पर पौधे सूख चुके थे, जबकि कई जगह अभी फल लगे हुए थे और उनसे अफीम निकालने की तैयारी चल रही थी। त्रिपुरी गांव से करीब 1800 ग्राम अफीम का रस भी जब्त किया गया है।
प्रशासन ने लोगों से की अपील
बलरामपुर के कलेक्टर राजेंद्र कटारा के अनुसार सीमावर्ती इलाकों में बाहरी लोगों द्वारा अफीम की खेती कराई जा रही थी। उन्होंने कहा कि अब राजस्व, पुलिस, वन विभाग और पंचायत की संयुक्त टीम पूरे क्षेत्र में जांच कर रही है। कलेक्टर ने लोगों से अपील भी की है कि अगर कहीं अवैध मादक पदार्थों की खेती या गतिविधि दिखे तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।