HC Verdict on Rape Promise of Marriage

शादी का झांसा देकर संबंध बनाना हर मामले में रेप नहीं: CG हाईकोर्ट, 20 साल बाद युवक बरी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि हर मामले में शादी का झांसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता। 20 साल पुराने मामले में युवक को बरी किया गया।

By : Admin
शादी का झांसा देकर संबंध बनाना हर मामले में रेप नहीं: CG हाईकोर्ट, 20 साल बाद युवक बरी

Chhattisgarh High Court

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में एक पुराने आपराधिक मामले में हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि हर मामले में शादी का झांसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही  करीब 20 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए आरोपी युवक को बरी कर दिया। अदालत का कहना था कि घटना के समय महिला बालिग थी और उसे संबंधों के परिणामों की जानकारी थी।

लोअर कोर्ट की सजा हाईकोर्ट ने रद्द की

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जिला एवं सत्र न्यायालय, अंबिकापुर द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया। निचली अदालत ने आरोपी युवक को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए सात साल की सजा और 5000 रुपये का जुर्माना लगाया था। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दोनों के बीच संबंध सहमति से बने हों, तो उसे दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

क्या है पूरा मामला

यह मामला सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2000 में पीड़िता 12वीं की छात्रा थी और किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उसकी दोस्ती एक युवक से हुई, जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गई। कुछ समय बाद दोनों एक ही मकान में साथ रहने लगे। करीब तीन साल तक दोनों के बीच शारीरिक संबंध रहे। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों अपने-अपने गांव लौट गए।

संपर्क टूटने के बाद दर्ज हुई शिकायत

समय के साथ युवक ने युवती से संपर्क खत्म कर दिया। इसके बाद युवती ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि युवक ने शादी का झांसा देकर तीन साल तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर युवक को गिरफ्तार किया और जांच के बाद अदालत में चालान पेश किया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ शादी का वादा करके बनाए गए संबंध हर परिस्थिति में दुष्कर्म नहीं माने जा सकते। अदालत ने यह भी कहा कि घटना के समय महिला की उम्र लगभग 26 वर्ष थी और उसे अपने फैसलों और उनके परिणामों की पूरी जानकारी थी। ऐसे में यह संबंध सहमति से बने माने जाएंगे। इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए आरोपी युवक को आरोप से बरी कर दिया।

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