परिवार के किसी सदस्य के पहले से सरकारी सेवा में होने पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं होगा। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नीति का हवाला देते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया और याचिका खारिज कर दी।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट आदेश देते हुए याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा यदि मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं मिलेगा। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में यह नहीं देखा जा सकता कि नौकरी करने वाला सदस्य परिवार की आर्थिक मदद करता है या अलग रह रहा है।
दरअसल, हाई कोर्ट का यह फैसला दुर्ग निवासी वीरमणि सोनवानी की याचिका पर आया। उनके पिता कृषि विभाग में कृषि विकास अधिकारी थे, जिनका 19 अक्टूबर 2016 को निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी, लेकिन विभाग ने उनके भाई के पहले से सरकारी सेवा में होने का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया था।
हाई कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ ने राज्य सरकार की अनुकंपा नियुक्ति नीति और हाई कोर्ट की फुल बेंच के पहले से तय कानूनी सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि अदालत नीति से अलग जाकर राहत नहीं दे सकती। जब नियम स्पष्ट हैं, तब आर्थिक निर्भरता या पारिवारिक संबंधों की अलग से जांच कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी
याचिकाकर्ता का कहना था कि उनका भाई अलग रहता है और परिवार की आर्थिक मदद नहीं करता। इसी आधार पर उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार मांगा। हालांकि अदालत ने माना कि नीति में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर इस तरह की परिस्थितियों को अपवाद माना जा सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि
पिता के निधन के बाद विभाग ने 7 मार्च 2020 को पहला आवेदन अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां कुछ पहलुओं पर दोबारा विचार करने की प्रक्रिया चली। विभाग ने 12 अगस्त 2021 को फिर आवेदन खारिज कर दिया। इसके खिलाफ दोबारा याचिका दायर की गई, लेकिन अदालत ने इस बार भी विभाग के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका निरस्त कर दी।
दूसरे मामलों पर क्या असर पड़ेगा
इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े ऐसे मामलों में नीति की व्याख्या और स्पष्ट हो गई है। यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है, तो केवल आर्थिक कठिनाई या अलग रहने का तर्क देकर अनुकंपा नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में अंतिम आधार सरकारी नीति ही होगी, न कि व्यक्तिगत परिस्थितियों का अलग आकलन।