भाजपा ने छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया। संगठन में सक्रिय और महिला आयोग से जुड़ी रहीं वर्मा को मातृशक्ति प्रतिनिधित्व के तौर पर मौका।
रायपुर। छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सीट के लिए आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। लंबे मंथन और नामों की चर्चा के बाद पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार घोषित किया है। संगठन के भीतर पिछले कुछ समय से यह संकेत मिल रहे थे कि इस बार महिला चेहरे को प्राथमिकता मिल सकती है, और वही हुआ।
पैनल से टिकट तक का सफर
भाजपा ने शुरुआत में सात नामों का पैनल तैयार किया था। इनमें लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल, सरोज पांडेय, भूपेंद्र सवन्नी, किरण बघेल, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी और निर्मल का नाम शामिल था।बाद में विचार-विमर्श के बाद तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए गए लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी। अंतिम दौर में पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा के नाम पर मुहर लगा दी।

संगठन और सामाजिक समीकरण
पार्टी के अंदर चर्चा थी कि इस बार राज्यसभा में ऐसा चेहरा भेजा जाए जो संगठन से जुड़ा हो और सामाजिक संतुलन भी साध सके। लक्ष्मी वर्मा प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।भाजपा सूत्रों का कहना है कि मातृशक्ति को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के तहत यह फैसला लिया गया है , खासकर ऐसे समय में जब पार्टी महिला वोटरों के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।
क्या संदेश देना चाहती है भाजपा?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह फैसला सिर्फ एक सीट भरने का नहीं, बल्कि संदेश देने का है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत भी इसमें छिपा है।अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि विपक्ष इस नामांकन पर क्या रणनीति अपनाता है। फिलहाल भाजपा खेमे में फैसले को लेकर संतोष का माहौल है।