छत्तीसगढ़ विधानसभा में 120 पूर्व नक्सलियों की मौजूदगी चर्चा में रही। एक करोड़ और 25 लाख के इनामी रहे चेहरों ने सदन की कार्यवाही देखी। सरकार की पुनर्वास नीति को बड़ा संकेत माना जा रहा है।
रायपुरः छत्तीसगढ़ की राजनीति में गुरुवार का दिन कुछ अलग था। विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बैठे 120 लोग आम आगंतुक नहीं थे। ये वे चेहरे थे जो कभी जंगलों में हथियार लेकर घूमते थे, जिन पर लाखों-करोड़ों के इनाम थे। आज वही लोग लोकतंत्र की बहस को चुपचाप सुन रहे थे। यह सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि एक प्रतीक था जो बंदूक से बैलेट तक के सफर को दिखा रहा था।
करोड़ों के इनामी से दर्शक दीर्घा तक
इन 120 नक्सली लोगों में एक नाम सरेंडर किए रुपेश का भी शामिल था। उस पर कभी एक करोड़ का इनाम घोषित था। वहीं, 25 लाख का इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा भी मौजूद रहा। चैतू को 2013 के कुख्यात झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है, जिसमें कई कांग्रेस नेताओं की जान गई थी। जगदलपुर में तीन महीने पहले आत्मसमर्पण करने वाला यही चैतू अब सादी टोपी में, शांत भाव से सदन की कार्यवाही सुनता दिखा। दृश्य थोड़ा असामान्य था, पर संदेश साफ था जो बयां कर रहा था कि रास्ता बदलना संभव है।
गृहमंत्री के घर डिनर, लाल कालीन स्वागत
विधानसभा पहुंचने से एक रात पहले इन पूर्व नक्सलियों को डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा के नवा रायपुर स्थित निवास पर आमंत्रित किया गया। माहौल औपचारिक कम, संवाद ज्यादा था। लाल कालीन बिछा था, पुष्पवर्षा हुई और सबने एक साथ भोजन किया। विजय शर्मा ने व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। उनके अनुभव सुने और रायपुर भ्रमण को लेकर सुझाव भी दिए। सरकार की ओर से यह एक भरोसे का संकेत था कि जो मुख्यधारा में लौटे हैं, उन्हें सम्मान भी मिलेगा।
पहली बार इतने करीब से देखी लोकतांत्रिक प्रक्रिया
अगली सुबह कड़ी सुरक्षा जांच के बाद सभी को विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बैठाया गया। कई चेहरों पर उत्सुकता साफ झलक रही थी। प्रश्नकाल चल रहा था। सत्ता और विपक्ष के बीच बहस हो रही थी। पूर्व नक्सली ध्यान से सुन रहे थे। कुछ नोट भी कर रहे थे। शायद यह उनके लिए एक नया अनुभव था। उस व्यवस्था को इतने करीब से देखने का, जिसके खिलाफ वे कभी खड़े थे। एक अधिकारी ने कहा कि यह सिर्फ विजिट नहीं बल्कि मानसिक बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा है।
पुनर्वास नीति को बड़ा संदेश
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 2937 नक्सली पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर चुके हैं। 2025 की नई नीति में इनाम राशि, कौशल प्रशिक्षण, जमीन, आवास और रोजगार के प्रावधान जोड़े गए हैं। राज्य के सात पुनर्वास केंद्रों में 1700 से अधिक लोग प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। सरकार इसे अपनी नीति की सफलता मान रही है, वहीं राजनीतिक हलकों में इसे प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। कभी जिन नामों से डर जुड़ा था। वही नाम अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साक्षी बने। तस्वीरें अलग थीं समय भी अलग है… और शायद सोच भी।