CGPSC भर्ती घोटाले में ED और CBI ने भिलाई में पूर्व सचिव जेके ध्रुव और अमृत खलको के ठिकानों पर छापा मारा। जानिए क्या है पूरा मामला और जांच में अब तक क्या सामने आया है।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार सुबह दोनों एजेंसियों की संयुक्त टीम ने भिलाई में CGPSC के पूर्व सचिव जीवन किशोर (जेके) ध्रुव और राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलको के ठिकानों पर छापेमारी की।
सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की। माना जा रहा है कि जांच एजेंसियां भर्ती घोटाले से जुड़े नए सबूतों और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही हैं।
सुबह 6:30 बजे शुरू हुई छापेमारी
सूत्रों के मुताबिक, ED और CBI की टीम सुबह करीब 6:30 बजे जेके ध्रुव के भिलाई स्थित निवास पहुंची। कई घंटों तक चली इस कार्रवाई में घर में मौजूद महत्वपूर्ण दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डाटा की जांच की गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के दौरान किन-किन लोगों को लाभ पहुंचाया गया।
अमृत खलको के घर भी पहुंची ED टीम
ED की टीम भिलाई के तालपुरी स्थित राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलको के निवास पर भी पहुंची। यहां सर्च ऑपरेशन के साथ पूछताछ की कार्रवाई की गई। जांच के दायरे में उनके परिवार के सदस्य भी हैं। आरोप है कि CGPSC चयन सूची में उनकी बेटी नेहा और बेटे निखिल का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ था। इसी संदर्भ में एजेंसियां बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।
क्या है CGPSC भर्ती घोटाला?
पूरा मामला CGPSC द्वारा वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। भर्ती परिणाम घोषित होने के बाद कई चयनों पर सवाल उठे थे, जिसके बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में पेपर लीक और चयन सूची में हेरफेर के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए थे। साथ ही मेरिट सूची में शामिल कुछ उम्मीदवारों के प्रभावशाली परिवारों से जुड़े होने के आरोप भी लगे हैं।
जेके ध्रुव पर चयन प्रक्रिया प्रभावित करने का आरोप
CBI जांच में पूर्व सचिव जेके ध्रुव पर पद का दुरुपयोग कर चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि उन्होंने अपने बेटे समेत कुछ करीबी लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया। इसी कड़ी में उनके ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रही ED
CBI जहां भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है, वहीं ED इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं को खंगाल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या कथित अवैध कमाई को संपत्तियों, बैंक खातों या अन्य निवेश माध्यमों में लगाया गया। साथ ही जांच के दौरान एक संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने की बात भी सामने आई है। महासमुंद क्षेत्र के एक रिसॉर्ट और कुछ कोचिंग संचालकों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। आरोप है कि यहां अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्न उपलब्ध कराए गए थे।
कई आरोपी पहले ही पहुंच चुके हैं जेल
CGPSC घोटाले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक सहित कई आरोपी पहले से जेल में हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक 29 लोगों की भूमिका सामने आ चुकी है और कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं।
चार्जशीट के बाद ट्रायल की प्रक्रिया जारी
CBI इस मामले में सैकड़ों पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल कर चुकी है। कुछ आरोपी जमानत पर बाहर हैं, जबकि कई प्रमुख आरोपी अब भी न्यायिक हिरासत में हैं। मामला अब ट्रायल के चरण में पहुंच चुका है और जांच एजेंसियां लगातार नई कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थियों और विपक्षी दलों ने लगातार विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी थी, जिसके बाद घोटाले में कई बड़े नाम सामने आए और कार्रवाई का दायरा बढ़ता गया।
भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता पर उठे सवाल
CGPSC भर्ती घोटाले ने राज्य की चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हजारों अभ्यर्थियों का कहना है कि ऐसी अनियमितताएं युवाओं की मेहनत और भविष्य दोनों को प्रभावित करती हैं।