मध्य प्रदेश में भाजपा ने सिंधिया के गढ़ में राजनीतिक संतुलन साधते हुए विरोधी नेताओं को भी निगम-मंडलों में अहम जिम्मेदारी दी, संगठन को मजबूत करने का संकेत।
शिवपुरी। मध्य प्रदेश में भाजपा ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सियासी संतुलन साधने के संकेत दिए हैं। मोहन सरकार द्वारा निगम-मंडलों में की जा रही नियुक्तियों में इस बार खास रणनीति देखने को मिली है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्र में पार्टी ने उनके विरोधी माने जाने वाले नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठन सभी को साथ लेकर चलने की दिशा में काम कर रहा है।
विरोधी खेमे को भी मिला प्रतिनिधित्व
गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में भाजपा ने पूर्व सांसद केपी यादव को मध्य प्रदेश राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत को वन विकास निगम की कमान सौंपी गई है। दोनों ही नेता पहले सिंधिया विरोधी खेमे से जुड़े माने जाते रहे हैं।
इन नियुक्तियों को राजनीतिक संतुलन के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी ने संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं और नए जुड़े नेताओं के बीच तालमेल बनाने की कोशिश की है।
संगठन सर्वोपरि का संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सिंधिया का प्रभाव मजबूत है, लेकिन भाजपा यह सुनिश्चित करना चाहती है कि संगठन के भीतर सभी वर्गों को समान अवसर मिले। निगम-मंडलों में नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने यह स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत प्रभाव के साथ-साथ संगठन की प्राथमिकता भी महत्वपूर्ण है। इस कदम को उन कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे।
पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि भी अहम
केपी यादव ने 2019 के लोकसभा चुनाव में गुना सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराया था। हालांकि, 2024 के चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला और सिंधिया स्वयं इस सीट से सांसद चुने गए। अब यादव को निगम में जिम्मेदारी देकर पार्टी ने संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
दूसरी ओर, रामनिवास रावत ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और विजयपुर उपचुनाव में किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस दौरान सिंधिया का प्रचार से दूर रहना भी चर्चा का विषय रहा था।
आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर रणनीति
भाजपा की यह रणनीति आने वाले चुनावी कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर तैयार की गई मानी जा रही है। 2027 में पंचायत चुनाव, उसके बाद नगरीय निकाय चुनाव और 2028 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में पार्टी अभी से संगठनात्मक संतुलन मजबूत करने में जुटी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम करने और सभी गुटों को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।