मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान एसटी पक्ष ने भी विरोध दर्ज कराया। मेरिट सीटों और ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर हुई अहम बहस अब अगले चरण में पहुंचेगी।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला अब नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सामान्य वर्ग के बाद अब अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग ने भी बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण पर आपत्ति दर्ज कराई। अदालत ने बहस के दौरान मेरिट सीटों और खाली रहने वाली आरक्षित सीटों को लेकर भी अहम सवाल उठाए।
जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ के सामने बुधवार को हुई सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। विवाद का केंद्र यह रहा कि यदि ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया जाता है तो इसका असर सामान्य मेरिट की सीटों पर किस तरह पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को दोपहर 12 बजे तय की गई है।
एसटी पक्ष ने मेरिट सीटों पर जताई चिंता
एसटी याचिकाकर्ता रितु बडोले की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मुक्ता ने अदालत में कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के कई अभ्यर्थी आरक्षित कोटे के अलावा सामान्य मेरिट के आधार पर भी चयनित होते हैं। उनका तर्क था कि ओबीसी आरक्षण में 13 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी सामान्य वर्ग की सीटों से समायोजित होगी। इससे मेरिट के आधार पर चयन पाने वाले अन्य वर्गों, खासकर एसटी अभ्यर्थियों के अवसर कम हो सकते हैं।
खाली सीटों पर कोर्ट ने उठाया अहम सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विनय सराफ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब एसटी वर्ग की 30 से 40 प्रतिशत तक आरक्षित सीटें कई बार खाली रह जाती हैं तो ऐसे में ओबीसी आरक्षण को एसटी के साथ भेदभाव कैसे माना जा सकता है। इस पर एसटी पक्ष ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध आरक्षित सीटों को लेकर नहीं है बल्कि सामान्य मेरिट की सीटों में संभावित कमी को लेकर है।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर भी हुई कानूनी बहस
सुनवाई के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मुद्दा भी उठा। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने अदालत में दलील दी कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण क्षैतिज प्रकृति का है। इसलिए 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा से जुड़े मामलों में इसकी अलग कानूनी व्याख्या की जानी चाहिए। इस पहलू पर भी अदालत ने पक्षकारों की दलीलें सुनीं।
ओबीसी पक्ष से मांगे गए विस्तृत तथ्य
ओबीसी पक्ष की ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने अदालत को बताया कि प्रदेश में इस समय कुल 60 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इस दावे के समर्थन में विस्तृत तथ्य और कानूनी आधार प्रस्तुत करने के लिए हाई कोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई तक आवश्यक दस्तावेज और जानकारी पेश करने का निर्देश दिया। सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी और अधिवक्ता अपराजिता ने भी अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। अब सभी पक्षों की आगे की दलीलों पर 23 जुलाई को दोपहर 12 बजे फिर सुनवाई होगी।