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भोपाल में बड़े बंगलों पर नेता-अधिकारियों का कब्जा

भोपाल में बड़े बंगलों पर नेता-अधिकारियों का कब्जा

भोपाल में बड़े बंगलों पर नेता-अधिकारियों का कब्जा

राजधानी में 30 गुना तक वसूली के निर्णय के बाद खाली होंगे बंगले

राजधानी भोपाल में शासकीय आवासों में नियमविरुद्ध रहने वाले लोगों को खाली कराने के उद्देश्य से मंगलवार को मंत्रि-परिषद द्वारा किराए के 30 गुना तक वसूली का निर्णय लिया गया। इसके बाद अधिकांश आवास खाली होने की संभावना है। 74 बंगले, 45 बंगले, चार इमली, प्रोफेसर्स कॉलोनी सहित अन्य स्थानों पर 'बी', 'सी' और 'डी' आकार के 20 से अधिक बंगलों में पूर्व जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी लंबे समय से अवैध रूप से निवासरत हैं। नए नियम लागू होने पर इन आवासों के खाली होने की पूरी संभावना है।

10 गुना राशि चुकाकर भी खाली नहीं होते आवास

संपदा संचालनालय के अधीन राजधानी के शासकीय बंगले और आवास गृह विभाग से आवंटित किए जाते हैं। इनके रख-रखाव और किराया वसूलने का जिम्मा लोक निर्माण विभाग के पास है। समय-समय पर लोक निर्माण विभाग नियमविरुद्ध या अवैध रूप से रह रहे लोगों को नोटिस जारी करता है। कई नेता और अधिकारी किराए का 10 गुना राशि चुकाकर भी बंगलों को खाली नहीं करते क्योंकि यह राशि लोकेशन और सुविधाओं के हिसाब से बाजार किराए से कम होती है। नए नियम के अनुसार यह राशि 30 गुना होगी, जिससे नियम का पालन मजबूती से होगा।

बंगला आवंटन पर केंद्र सरकार की भी नजर

मध्य प्रदेश में बंगला आवंटन पर केंद्र सरकार की भी नजर है। केंद्र ऐसे पूर्व जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की जानकारी मांग रहा है जिनके पास कोई सरकारी पद नहीं है, लेकिन वे सरकारी बंगले उपयोग में ले रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने मध्य प्रदेश की स्थिति पर नाराजगी जताई है और ऐसे नेताओं एवं अधिकारियों की जानकारी दिल्ली मंगवाई है।

राजधानी के साथ गृह जिलों में भी बंगले अवैध

राज्य सरकार के कई प्रभावशाली मंत्री और विधायक राजधानी में 'ई' और 'डी' आकार के बंगलों के साथ-साथ उनके गृह जिलों में भी बंगले आवंटित कराते रहे हैं। हालांकि नियमानुसार एक व्यक्ति को दो बंगलों का आवंटन नहीं किया जा सकता। कई पूर्व मंत्री चुनाव हारने के बाद भी लंबे समय तक राजधानी के बंगलों पर कब्जा बनाए रखते हैं।

विधायकों को मिल सकेंगे बंगले

आवास किराए पर 30 गुना अर्थदण्ड वसूली के इस नए नियम के बाद राज्य के विधायकों को आवास मिल सकेगा और सरकार का पैसा भी बचेगा। विधायक विश्रामगृह की पुनर्निर्माण प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अधिकांश आवास लगभग खाली हो चुके हैं।शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों से वसूली आसान कई शासकीय सेवकों ने बार-बार नोटिस मिलने के बाद भी शासकीय आवास खाली नहीं किए हैं। नए निर्णय के बाद संचालनालय सख्ती से इन्हें खाली कराएगा और नियमानुसार वसूली भी सुनिश्चित करेगा।

नेता पांच साल में चुकाते हैं 10 गुना तक राशि

जनप्रतिनिधि या शासकीय नियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद भी कई राजनेता और पूर्व जनप्रतिनिधि आवंटित बंगलों से कब्जा नहीं छोड़ते। संचालनालय इन्हें बंगलों को खाली कराने के नोटिस भेजता है। अब तक नियम के अनुसार, नेता हर पांच साल में एक बार किराए की 10 गुना राशि चुकाकर नोड्यूज प्राप्त करते थे। नए नियम से यह प्रक्रिया और प्रभावी होगी।अधिकारियों और कर्मचारियों से वसूली को लेकर शासन आश्वस्त है क्योंकि सेवानिवृत्ति के बाद भी उनसे वसूली संभव है।