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भोपाल का विचित्र ब्रिज 90 डिग्री नहीं बल्कि 119 डिग्री का बना, मंत्री बोले PWD उठाएगा सुधार का

भोपाल का विचित्र ब्रिज 90 डिग्री नहीं बल्कि 119 डिग्री का बना, मंत्री बोले PWD उठाएगा सुधार का खर्च

भोपाल का विचित्र ब्रिज 90 डिग्री नहीं बल्कि 119 डिग्री का बना मंत्री बोले pwd उठाएगा सुधार का खर्च

मध्यप्रदेश। भोपाल के विचित्र 90 डिग्री वाले ब्रिज पर मंत्री राकेश सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि, ब्रिज 90 नहीं बल्कि 119 डिग्री का बना है। कमेटी की रिपोर्ट तैयार हो गई है। भविष्य में गलती न दोहराई जाए इस पर फोकस किया जाएगा। बीते दिनों इस ब्रिज के गलत निर्माण के चलते 8 अधिकारियों के खिलाफ एक्शन हुआ था। मंत्री राकेश सिंह ने इस कार्यवाई को सरकार का बड़ा एक्शन बताया है। यह जानकारी भी सामने आई है कि, इस विचित्र पुल को सुधारने में आने वला खर्चा PWD उठाएगा। सुधारकार्य के लिए रेलवे से बातचीत की जाएगी।

राजधानी भोपाल के 90 डिग्री एंगल के आरओबी निर्माण के मामले में मोहन सरकार ने सख्त एक्शन लिया था। विचित्र पुल बनाने वाली कंपनी ब्लैक लिस्ट कर दी गई थी जबकि 8 इंजीनियर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

ऐशबाग आरओबी के निर्माण में हुई गंभीर लापरवाही में संज्ञान लेते हुए सरकार ने जांच के आदेश दिये थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर PWD के 8 इंजीनियर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है। दो सीई (चीफ इंजिनियर) सहित सात इंजीनियर्स को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। एक सेवानिवृत एसई के खिलाफ विभागीय जांच की जायेगी।

इस प्रोजेक्ट में आरओबी का त्रुटिपूर्ण डिजाईन प्रस्तुत करने पर निर्माण एजेंसी एवं डिजाईन कंसल्टेंट, दोनों को ब्लैक लिस्ट किया गया है। आरओबी में आवश्यक सुधार के लिए कमेटी बनाई गयी है। सीएम ने बताया था कि, सुधार के बाद ही आरओबी का लोकार्पण किया जाएगा।

इन अधिकारियों के खिलाफ हुआ एक्शन :

1. जीपी वर्मा मुख्य अभियंता

2. संजय खंडे मुख्य अभियंता

3. जावेद शकील, कार्यपालन यंत्री

4. शबाना रजक कार्यपालन यंत्री (डिजाइन)

5. सोनल सक्सेना, सहायक यंत्री (डिजाइन)

6. उमाशंकर मिश्रा, उपयंत्री

7. रवि शुक्ला, उपयंत्री

8. एमपी सिंह, सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री

रेलवे ने दी थी चेतावनी :

भोपाल के "90 डिग्री" रेल ओवरब्रिज के निर्माण मामले में जानकारी सामने आई थी कि, रेलवे द्वारा अजीबोगरीब डिजाइन को लेकर चिंता जताई जा चुकी थी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेलवे ने चेतावनी दी थी कि इस डिज़ाइन की वजह से यात्रियों को पेरशानी होगी और "इंजीनियरों की छवि खराब होगी"।

राजधानी भोपाल के सघन आबादी वाले क्षेत्र ऐशबाग क्षेत्र में 648 मीटर लंबे इस पुल को बनाने में 18 करोड़ रुपये की लागत आई थी। इसका उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाली लंबी देरी को खत्म करना और रोजाना लगभग तीन लाख लोगों के लिए यात्रा के समय को कम करना था।

इस ब्रिज के एक हिस्से का निर्माण लोक निर्माण विभाग कर रहा था, जबकि दूसरे हिस्से का काम रेलवे कर रहा था। लोक निर्माण विभाग ने डिजाइन का आकलन करने, जवाबदेही का मूल्यांकन करने और सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करने के लिए दो मुख्य इंजीनियरों और एक कार्यकारी इंजीनियर सहित चार सदस्यीय समिति का गठन किया है।

द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा एक्सेस किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि 4 अप्रैल, 2024 को भारतीय रेलवे के पर्यवेक्षकों की एक टीम ने उस जगह का निरीक्षण किया जहां पुल बनाया जा रहा था। उस समय, रेलवे द्वारा निर्मित पुल का उप-संरचना तैयार हो चुका था और काम प्रगति पर था।

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