भोपाल के बोट क्लब इलाके में जंगल से निकलकर सांभर सड़क और दुकानों तक पहुंच रहे हैं। कचरा और फास्ट फूड के कारण वन्यजीवों की सेहत पर खतरा बढ़ा, निगरानी पर सवाल उठे।
राजधानी भोपाल के बोट क्लब क्षेत्र में इन दिनों सांभर वन विहार के जंगल से निकलकर सड़क और फास्ट फूड दुकानों के आसपास पहुंच रहे हैं। नमक और खाद्य पदार्थों के आकर्षण के कारण ये वन्यजीव चाट-पकौड़ी और अन्य खाद्य सामग्री की झूठन तक खाने लगे हैं। कई बार इन्हें कुत्तों के साथ कचरा चाटते हुए भी देखा गया है।
दुकानों का कचरा कर रहा आकर्षित
क्षेत्र में मैगी, चाट-पकौड़ी, कोल्ड ड्रिंक और चिप्स-नमकीन के करीब 25 ठेले और दुकानें संचालित हो रही हैं। इन दुकानों से निकलने वाला कचरा अक्सर तालाब किनारे और आसपास फेंक दिया जाता है। यही नमकीन कचरा सांभरों को आकर्षित कर रहा है, जिससे वे अब बिना किसी भय के आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने लगे हैं।वन विभाग के अनुसार, पिछले एक महीने से वन विहार के कुछ सांभर मानव संग्रहालय, श्यामला पहाड़ी और बोट क्लब क्षेत्र के आसपास लगातार देखे जा रहे हैं। हाल ही में तीन मादा सांभर कचरे में भोजन तलाशते हुए नजर आए थे, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था।
मानव संग्रहालय परिसर के जंगल क्षेत्र में भेजे जा रहे
टीम के मौके पर पहुंचने पर तीनों सांभरों को वहां से हटाकर मानव संग्रहालय परिसर के जंगल क्षेत्र की ओर भेजा गया। बताया जा रहा है कि वन विहार की सुरक्षा जाली कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है। साथ ही तालाब का जलस्तर कम होने के कारण भी वन्यजीव बाहर निकल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हिरण प्रजाति के जानवर नमक की ओर स्वाभाविक रूप से आकर्षित होते हैं।
तले-भुने खाद्य पदार्थ खतरनाक
जानकारों का कहना है कि चिप्स, नमकीन और तले-भुने खाद्य पदार्थ वन्यजीवों के प्राकृतिक आहार का हिस्सा नहीं हैं। इन्हें खाने से उनके पाचन तंत्र और किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।वन क्षेत्र में कचरा फेंकना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रावधानों का उल्लंघन है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
निगरानी बढ़ाई गई
वन विहार के सहायक संचालक वीरेंद्र सिंह के अनुसार, सांभरों की आवाजाही की सूचना मिलने के बाद संबंधित संस्थानों के सुरक्षाकर्मियों को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।वहीं पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय उद्यान और चिड़ियाघर के आसपास 100 मीटर तक ईको-सेंसिटिव जोन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में फास्ट फूड दुकानों का संचालन चिंताजनक है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन, नगर निगम और वन विभाग को मिलकर इस पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।