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ट्रेनों में अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, RPF की ‘सादे कपड़ों’ में गश्त से हाईटेक होगी सुरक्षा

ट्रेनों में अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, RPF की ‘सादे कपड़ों’ में गश्त से हाईटेक होगी सुरक्षा

भोपाल मंडल में ट्रेनों की सुरक्षा के लिए नया हाईटेक मॉडल लागू, सादे कपड़ों में जवान, CCTV और सख्त निगरानी शुरू।

ट्रेनों में अपराधियों पर कसेगा शिकंजा rpf की ‘सादे कपड़ों’ में गश्त से हाईटेक होगी सुरक्षा

भोपालः रेल यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए भोपाल मंडल ने नए साल 2026 में एक नई और प्रभावी पहल शुरू की है। पिछले वर्षों के अनुभवों से सीख लेते हुए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी (GRP) ने संयुक्त रूप से एक हाईटेक सुरक्षा मॉडल लागू किया है, जिसका उद्देश्य ट्रेनों और स्टेशनों पर होने वाले अपराधों पर निर्णायक अंकुश लगाना है।

इस नई व्यवस्था के तहत अब ट्रेनों में वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ-साथ सादे कपड़ों में भी जवान तैनात किए जा रहे हैं। ये जवान यात्रियों के बीच सामान्य यात्री की तरह मौजूद रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे और समय रहते कार्रवाई करेंगे। इससे अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी आसान होगी।

ये है क्राइम के सेंसेटिव स्टेशन

इटारसी से रानी कमलापति (RKMP) स्टेशन के बीच के रेल खंड को विशेष रूप से संवेदनशील घोषित किया गया है। यहां अतिरिक्त पेट्रोलिंग के साथ आधुनिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी बढ़ाई गई है। वर्ष 2025 में RPF-GRP की संयुक्त कार्रवाई में 160 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और करीब 33 लाख रुपये मूल्य का चोरी हुआ सामान बरामद किया गया। बरामद मोबाइल फोन में से लगभग 50 प्रतिशत यात्रियों को वापस लौटाए जा चुके हैं।

इन ट्रेनों को विशेष निगरानी में रखा गया है

चोरी की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए बिलासपुर एक्सप्रेस और इंदौर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया है। वहीं महिला यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई गई है, जिसके तहत छेड़छाड़ जैसे मामलों के निपटारे की समयसीमा घटाकर मात्र दो महीने कर दी गई है।

सादे कपड़े में तैनात पुलिस निगरानी का नया मॉडल

रानी कमलापति रेलवे स्टेशन थाना प्रभारी एम.एस. सोमवंशी के अनुसार, तकनीक और मानव संसाधन के बेहतर समन्वय से ट्रेनों में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। नई व्यवस्था के तहत यात्रियों की सुरक्षा अब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सादे कपड़ों में तैनात जवानों की सतर्कता के रूप में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देगी।

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