Bhopal Love Jihad Case : मध्यप्रदेश। भोपाल लव जिहाद मामले की जांच से मानव अधिकार आयोग असंतुष्ट है। आयोग ने गिरोह के अन्तर्राजीय संपर्क होने का अंदेशा जताया है। बताया जा रहा है कि, पुलिस की जांच से असंतुष्ट आयोग पुनः जांच के लिए टीम भेजेगा। जांच टीम में एक आईपीएस अधिकारी भी शामिल होगा। आयोग इस बात से भी आशंकित है कि, पुलिस ने शारिक मछली और फरहान के संबंधों पर जांच नहीं की है। कई राज्यों में इस गिरोह का नेटवर्क फैले होने का अंदेशा आयोग को है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, बच्चियों के साथ हुए अपराध को आयोग ने सांप्रदायिक लैंगिक अपराध बताया है।
दरअसल, भोपाल के निजी कॉलेज की छात्राओं के खिलाफ एक संगठित अपराध का मामला सामने आया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि, आरोपियों ने छात्राओं से दोस्ती की और उन्हें प्रेम जाल में फंसाया। उनके साथ बलात्कार किया और उनके अश्लील वीडियो बनाए। आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाई और उन पर धर्म परिवर्तन और शादी के लिए दबाव बनाया।
26 अप्रैल 2025 की कार्यवाही के तहत, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की खंडपीठ, जिसकी अध्यक्षता प्रियांक कानूनगो कर रहे थे, ने मामले में संज्ञान लिया था। निर्देश दिया गया था कि, वह शिकायत को संबंधित प्राधिकारी को भेजे भोपाल, मध्य प्रदेश को निर्देश दिए गए कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जाए और दो सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इसके अलावा, आयोग ने महानिदेशक, एनएचआरसी को एक टीम गठित करने का निर्देश दिया और रजिस्ट्रार (कानून) को भी जांच दल का हिस्सा बनने और गहन जांच करने का निर्देश दिया गया।
आयोग के निर्देशानुसार, डीएसपी मोनिया उप्पल, इंस्पेक्टर संतोष कुमार आर और सीटी एमएन राउत वाली एनएचआरसी की टीम ने 13 मई 2025 से 17 मई 2025 तक शिकायतकर्ता के आरोपों की मौके पर जांच की। 4 जांच के दौरान, एनआईआरसी की टीम ने पुलिस आयुक्त, भोपाल के कार्यालय, संबंधित पुलिस स्टेशनों, कॉलेज और क्लब 90 परिसर का दौरा किया। टीम ने पीड़ितों और उनके परिवार के सदस्यों से बात की। टीम ने स्वतंत्र गवाहों, संबंधित पुलिस अधिकारियों और बीएमसी और कॉलेज के संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ की। टीम ने पुलिस आयुक्त और जिला मजिस्ट्रेट, भोपाल के साथ भी बातचीत की। टीम ने जो सिफारिशें प्रस्तुत कीं, वो आयोग को अपूर्ण और अनिर्णायक प्रतीत हुई।
आयोग द्वारा मामले की जांच में यह पता चला कि, इस मामले का मुख्य आरोपी फरहान मध्यप्रदेश के साथ-साथ बाहर भी कई लोगों के संपर्क में था। आयोग ने पाया है कि, विभिन्न राज्यों में अपराध के संबंध में उसके आपराधिक नेटवर्क से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि, टीम के निष्कर्ष इस पहलू पर चुप हैं।आयोग का कहना है कि, राज्य के भीतर और साथ ही पूरे भारत में अपराध का ऐसा नेटवर्क, यदि कोई है, तो इसका पता लगाने की जरूरत है। रिपोर्ट में कॉलेज परिसर में एंटी-रैगिंग सेल के कामकाज के बारे में भी कुछ नहीं कहा गया है, जो कि यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार अनिवार्य है।
आयोग ने महानिदेशक (आई) को एसएसपी के पद से नीचे के अधिकारी की अध्यक्षता में एक जांच दल भेजने और चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने सरकार को दिए ये निर्देश :
पांच पीड़ितों में से, तीन पीड़ित जो प्राइवेट कॉलेज, भोपाल से अपनी पढ़ाई कर रही थी, उन्होंने आरोपियों के डर से अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। वे सभी अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं। इसलिए आयोग ने सरकार को तत्काल निर्देश दिया है कि, तीनों पीड़ित (गार्डन और एफ पीएस अशोका गार्डन की पीड़ित) अपनी पढ़ाई जारी रखें।
जांच के दौरान, एनएचआरसी की टीम द्वारा पाया गया कि 2-3 और लड़कियां हैं जिन्होंने आरोपी फरहान द्वारा गलत काम करना स्वीकार किया है लेकिन वे पुलिस को घटना की रिपोर्ट नहीं करना चाहती हैं। मध्य प्रदेश सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि इन पीड़ितों की शिक्षा में भी बाधा न आए। प्रासंगिक रूप से, मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव यह भी सुनिश्चित करेंगे कि इन सभी पीड़ितों को नए कॉलेज में अपने इच्छित पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिले।
संबंधित प्राधिकारी एससी/एसटी/ओबीसी श्रेणियों के पीड़ितों को शैक्षणिक शिक्षा पूरी होने तक अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए तत्काल उपाय करें, जो आरोपियों के डर के कारण बंद कर दी गई थी। राज्य सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि पीड़ितों को उनकी पुरानी छात्रवृत्ति की राशि मिले, जो कथित तौर पर पीड़ितों को उनके पिछले अध्ययन के दौरान भुगतान नहीं की गई थी।
आयोग को सभी पीड़ितों से अनुरोध प्राप्त हुए, जिन्होंने अपनी सुरक्षा के बारे में आशंका व्यक्त की और इस संबंध में आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग की। इसलिए, घटनाओं की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए, प्रत्येक मामले में खतरे की धारणा का आकलन करें,और पीड़ितों को आवश्यकतानुसार पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करें।