भोपाल में महाशिवरात्रि पर किन्नर धर्म सम्मेलन, 500 से अधिक किन्नरों की घर वापसी। शंकराचार्य जैसे पदों की घोषणा पर संत समाज और संगठनों का विरोध
महाशिवरात्रि पर आयोजन, शंकराचार्य जैसे पदों की घोषणा से उठा विवाद
महाशिवरात्रि के अवसर पर 500 से अधिक किन्नरों ने घर वापसी करते हुए सनातन धर्म अपनाया है। राजधानी में रविवार को लालघाटी स्थित स्थल पर किन्नर अखाड़ा के किन्नर ऋषि अजय दास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से किन्नर शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य जैसे नए पदाधिकारियों की घोषणा भी की गई। उधर, किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. प्रो. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने इस आयोजन और घोषणाओं का विरोध किया है। उन्होंने इसे सनातन परंपरा और अनुशासन के विपरीत बताया।
शंकराचार्य बनाकर सनातन को पहुंचाया आघात
श्री हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने किन्नर अखाड़े में शंकराचार्य बनाए जाने का विरोध जताया है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि हमारे चार मठों में ही शंकराचार्य हो सकते हैं। इस तरह की नियुक्तियां हिंदू समाज को बांटने का काम कर रही हैं।उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार कोई भी शंकराचार्य बनने लगेगा, तो इससे सनातन परंपरा को गंभीर आघात पहुंचेगा, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसी को शंकराचार्य, किसी को बनाया जगदगुरु
समारोह में शंकराचार्य नियुक्ति, महामंडलेश्वर चयन और किन्नर समाज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। अर्धनारीश्वर स्वरूप की भावना के साथ हिमांशु सखी को पुष्कर पीठ का शंकराचार्य घोषित किया गया।इसके साथ ही हेमांगी सखी को महामंडलेश्वर बनाया गया और किन्नर भागवत कथा वाचक के रूप में शंकराचार्य पद प्रदान किया गया। काजल ठाकुर और संजना को जगतगुरु का पद दिया गया, जबकि रानी ठाकुर को महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया।
इसके पहले पहले आयोजित कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे किन्नरों ने विधि-विधान से सनातन धर्म स्वीकार किया। आयोजक ऋषिदास ने बताया कि कुल मिलाकर लगभग 500 किन्नरों ने 'घर वापसी की है। यह आने वाले समय में और भी लोगों को इस पहल से जोड़ेंगे। उनका कहना था कि धर्म परिवर्तन, टेरर फंडिंग जैसी घटनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंत्ता थी।
पदाधिकारियों की घोषणा होते ही विरोध भी शुरू
अब जब किन्नर समाज बड़ी संख्या में धर्म अपनाकर लौट रहा है, यह बदलाव शुभ संकेत है। शंकराचार्य की मर्यादा अखंड इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं: पदाधिकारियों की घोषणा होते ही विरोध भी शुरू हो गया है। किन्नर अखाडे की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. प्रो. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा है कि शंकराचार्य की मर्यादा अखंड है और इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं है।
परंपरा बनाम नई पहल
वह राजधानी के जहांगीराबाद स्थित लाल शादी हाल में आयोजित पटाअभिषेक कार्यक्रम में शामिल हुई थी और पत्रकारों से चर्चा कर रही थी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पद परंपरा और अनुशासन का प्रतीक है।शंकराचार्य भगवान द्वारा स्थापित चारों पीठों की व्यवस्था अत्यंत विशिष्ट और अनुशासित है। पद की गरिमा होती है, शंकराचार्य का पद केवल उसी संन्यासी को प्राप्त हो सकता है, जो निदंडी संन्यास परंपरा में विधिवत दीक्षित हो और वेद- वेदांत में पूर्णतः पारंगत हो। अखाड़ा वर्तमान चारों शंकराचार्यों की आध्यात्मिक अधिसत्ता को पूर्ण श्रद्धा के साथ स्वीकार करता है। यहीं सनातन धर्म की स्थापित्त और शास्त्रसम्मत व्यवस्था है, जिसका संरक्षण हर सनातनी का कर्तव्य है।