भोपाल फिल्म फेस्टिवल के पहले दिन अभिनेत्री हुमा कुरैशी शामिल हुईं। उद्घाटन सत्र के साथ कुछ फिल्मों और एलजीबीटीक्यू स्टॉल को लेकर विवाद भी सामने आया
द भोपाल फिल्म फेस्टिवल में पहले दिन शामिल हुईं अभिनेत्री हुमा कुरैशी
द भोपाल फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस फेस्टिवल का यह पहला साल है। उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि यह एक ऐसा मंच बने, जिसके केंद्र में भारत हो, भारत का इतिहास, भारत की संस्कृति, भारत के नायक और अंततः ऐसा कंटेंट, जिसमें केवल भारत के हित ही सर्वोपरि हों। फिल्मों और फिल्मकारों को यह मंच देने के पहले इन सावधानियों पर गौर किया जाए, क्योंकि बात बहुत आगे जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सिनेमा स्टडी विभाग के होनहार विद्यार्थियों के दो समूहों द्वारा बनाई दो शॉर्ट फिल्में इस फेस्टिवल में आई है। इसके अलावा मध्यप्रदेश के कान्हा और पेंच में फिल्माई गई दो वाइल्ड लाइफ डॉक्युमेंट्री भी। अगर यह फेस्टिवल भोपाल में हो रहा है तो यह भी देखना चाहिए कि भोपाल और मध्यप्रदेश का चित्रण, स्थानीय कहानियाँ, स्थानीय इतिहास और परंपराओं के अनछुए पहलू भी फिल्म निर्माण के लिए आकर्षण का केंद्र बनाए जाएँ।
फिल्म निर्माण की हरेक बारीकी में नई पीढ़ी एक नई सोच के साथ आगे आए और अपने देश के प्रति न्याय करे, पहले भोपाल फिल्म फेस्टिवल के युवा आयोजकों से यह उम्मीद तो की ही जानी चाहिए। गौरतलब है कि राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मोरफिक संस्था द्वारा मप्र पर्यटन बोर्ड के सहयोग से दो दिवसीय भोपाल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है।
फिल्म फेस्टिवल में पहले दिन अभिनेत्री हुमा कुरैशी के साथ स्मृति किरन की परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने भी फिल्मों फिल्म इंडस्ट्री एवं हुमा के निजी जीवन से संबंधित प्रश्न किए, जिनके हुमा ने उत्तर दिए। हुमा ने अपनी 'सिंगल सलमा', श्रीराम राघवन की फिल्म 'इक्कीस' और ग्रेट 'शमशुद्दीन फैमिली' देखने का आग्रह भी किया।

स्टिकर, की-रिंग्स बने विवाद का विषय
भोपाल फिल्म फेस्टिवल के आयोजक दावा करते हैं कि उनका यह आयोजन मप्र में युवाओं की रचनात्मकता और उन्हें अवसरों की उपलब्धता प्रदान करने वाला आयोजन है। आयोजन का उद्देश्य मप्र को सिनेमा के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने का है। इन दावों के बीच आयोजकों के सोशल मीडिया हैंडल पर उन विवादित फिल्मों की स्क्रीनिंग का प्रदर्शन किया जो विशुद्ध रूप से आपतिजनक और एक वैचारिकी के साथ जुड़ी हैं। 21 फरवरी से पहले एक निजी कॉलेज में आयोजकों ने ऐसी फिल्मों के प्रदर्शन भी किए। शनिवार को भी एक ऐसे ही आपत्तिजनक दृश्यों वाली फिल्म दिखाई गई। फिल्म फेस्टिवल में एक स्टॉल चचर्चाओं का विषय बना रहा। पेटर साहब की दुकान' नामक इस स्टॉल पर जो सामग्री विक्रय के लिए लगाई गई थी वह एलजीबीटीक्यू का प्रमोशन कर रही थी। यह स्टॉल स्थाति झा और राधिका गुप्ता द्वारा संचालित एक कपड़ों का ब्रांड है। जो एलजीबीटीक्यू थीम्स से जोड़े वरत्र, स्टिकर, फ्लैग बनाता है। इस दुकान पर स्टिकर्स, की-रिंग और शर्ट उपलब्ध थी जिसमें लिखा हुआ है hot, Gay and autistic Purroud-- बिल्ली का गुर्राना, आनंद प्रकट करने का एक सिंबॉलिक तरीका (मुख्यता Queer परेड में use होता है), वहीं LGBT Flags, Queer Hearts, Badges भी उपलब्ध है.. नई पीढ़ी को बर्बाद करने के लिए मुरायता 'Smoking is good, and you know it' Elemental जैसे कोट्स वाली टी शर्ट्स को डिस्प्ले पर रखा गया है ताकि स्टाल का अधिक से अधिक लोगों से परिचय हो
स्वदेश की खबर के बाद बीच में रोकनी पड़ी फिल्म 'स्मॉल चेंज'
फ्रांस के परिदृश्य में 1976 में बनी 'स्मॉल चेंज फीवर फिल्म को बीच में ही रोकना पड़ा। औपचारिक शुभारंभके ठीक बाद प्रदर्शित यह फिल्म स्कूली बच्चों के मनोभावों पर आधारित है। बावजूद इसके कहानी में बारह साल के लड़के का दोस्त की मां पर फिदा होने और अध्यापक की पत्नी की गर्भावस्था के दौरान क्लास रूप में अध्यापिका को लेकर बच्चों के रवैयों को दर्शकों ने भारतीय संस्कृति के खिलाफ माना। जिसके बाद कुछ ने आपत्ति भी जताई। बताया जाता है कि इसको देखते हुए फिल्म को बीच में ही रोकना पड़ गया। इसी तरह आयोजकों द्वारा 'किस' नामक आपत्तिजनक फिल्म का भी प्रदर्शन रोका गया।