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BJP Mahila Padyatra in Bhopal Over Reservation Bil

भोपाल में महिला आरक्षण बिल को लेकर बीजेपी की जन आक्रोश पदयात्रा, सीएम यादव भी हुए शामिल

भोपाल में महिला आरक्षण बिल पर विरोध के चलते बीजेपी ने जन आक्रोश पदयात्रा निकाली। सीएम मोहन यादव समेत कई नेता शामिल हुए। कांग्रेस पर महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ होने के आरोप लगे।


भोपाल में महिला आरक्षण बिल को लेकर बीजेपी की जन आक्रोश पदयात्रा सीएम यादव भी हुए शामिल

भोपाल में सोमवार को महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। लोकसभा में यह बिल पास न हो पाने के विरोध में मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने जन आक्रोश महिला पदयात्रा का आयोजन किया। इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, कई मंत्री, सांसद और महिला मोर्चा की कार्यकर्ता शामिल हुईं।

एमवीएम कॉलेज से रोशनपुरा तक निकली पदयात्रा

यह पदयात्रा भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू होकर लोक भवन और रोशनपुरा चौराहे तक पहुंची। यात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से काले गुब्बारे उड़ाकर विरोध दर्ज कराया।

सीएम मोहन यादव का बयान

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती।” मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर गलत रुख अपनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव पारित करेगी।

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर साधा निशाना

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए और कांग्रेस से सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ा विषय है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे ने कहा कि संसद में महिलाओं के अधिकारों से जुड़े बिल का विरोध किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

पंचायत राज्यमंत्री राधा सिंह ने कहा कि आजादी के इतने साल बाद भी महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। वहीं मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि विपक्षी दलों ने महिलाओं के सशक्तिकरण का विरोध किया है। सांसद लता वानखेड़े ने कहा कि यह बिल महिलाओं को पंचायत से लेकर संसद तक पहुंचाने का अवसर था, जिसे रोका गया। 

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