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भोपाल बड़ा तालाब में शिकारा पर्यटन’ के नए रंग: एक सप्ताह में 5500 लोग हुए सवार

भोपाल बड़ा तालाब में शिकारा पर्यटन’ के नए रंग: एक सप्ताह में 5500 लोग हुए सवार

भोपाल बड़ा तालाब में शिकारा पर्यटन’ के नए रंग एक सप्ताह में 5500 लोग हुए सवार

राजधानी भोपाल का बड़ा तालाब इन दिनों पर्यटन के नए रंग में नजर आ रहा है। कश्मीर की डल झील की तर्ज पर शुरू किए गए शिकारा पर्यटन को शहरवासियों और बाहर से आए पर्यटकों ने पहले ही सप्ताह में खूब पसंद किया। इस दौरान 5500 से अधिक लोगों ने शिकारा और अन्य बोटिंग सुविधाओं का आनंद लिया, जिससे बड़ा तालाब एक बार फिर शहर की पहचान बनता दिखाई दे रहा है।

शिकारा पर्यटन का शुभारंभ 4 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था। 20 शिकारा बोटों के संचालन से तालाब में पर्यटन गतिविधियों में नई ऊर्जा आई है। खास बात यह है कि भोपाल के अलावा अन्य शहरों से भी पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। लोग इसे शांत, सुरक्षित और सुकून भरा अनुभव बता रहे हैं।

पर्यटकों की प्रतिक्रिया

रायपुर से आई पर्यटक सीमा मौर्य ने कहा कि उन्होंने शिकारा शुरू होने की खबर सुनी थी, इसलिए विशेष तौर पर इसका आनंद लेने आई। आमतौर पर बोटिंग से डर लगने की बात कहते हुए उन्होंने बताया कि शिकारे में उन्हें बिल्कुल डर नहीं लगा और अनुभव बेहद शानदार रहा।

सीहोर के राकेश अग्रवाल ने कहा कि शिकारा के रेट कम होने चाहिए।

बोट क्लब की तय दरें

बोट/सवारी अवधि अधिकतम लोग कीमत (रु.)

शिकारा बोट 20 मिनट 6 व्यक्ति 450

शिकारा बोट 20 मिनट 4 व्यक्ति 300

पैडल बोट 30 मिनट 4 व्यक्ति 200

वॉटर साइकिल 20 मिनट 1 व्यक्ति 100

राकेश अग्रवाल ने कहा कि 20 मिनट की सवारी का 100 रुपए का रेट 50 रुपए होना चाहिए था। उन्होंने यह भी बताया कि शिकारा में बैठना कश्मीर जैसा अनुभव दे रहा है।

पर्यावरण और पर्यटन पर प्रभाव

महीनों से मोटर बोट और क्रूज बंद हैं। ऐसे में बिना शोर और प्रदूषण के चलने वाले शिकारे पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बनकर सामने आए हैं। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि तालाब की शांति और प्राकृतिक सुंदरता भी बनी हुई है।