ऐशबाग के बरखेड़ी स्थित 90 डिग्री वाले रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के री-डिजाइन कार्य को रेलवे ने हरी झंडी दे दी है। यह कार्य इस माह के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। पीडब्ल्यूडी रेलवे के हिस्से में यह काम करेगी। इस साल के अंत तक इस आरओबी को आम जनता के लिए शुरू करने के निर्देश मप्र शासन ने दिए हैं।
बता दें कि 10 माह पहले यह ब्रिज 90 डिग्री मोड़ को लेकर चर्चा में आया था। इसकी गलत डिजाइनिंग के कारण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जांच के बाद एसई समेत सात इंजीनियरों को निलंबित कर दिया था।इसके बाद इसी साल फरवरी में पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बैठक लेकर इसकी पुनः री-डिजाइनिंग करने के निर्देश दिए। इस बैठक में रेलवे और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी उपस्थित रहे। इस पर अंतिम सहमति बनी। इसके बाद हाल ही में रेल प्रशासन ने री-डिजाइन कार्य शुरू करने की अनुमति दे दी है।
90 डिग्री वाले हिस्से की बढ़ जाएगी चौड़ाई
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने बताया कि आरओबी की री-डिजाइन तैयार कर ली गई है। इसे विभाग से मंजूरी भी मिल गई है। इसमें मोड़ खत्म होने की जगह दो से 2.5 मीटर तक मोड़ का रेडियस बढ़ाकर चौड़ाई 8.5 मीटर से बढ़ाकर 11 मीटर कर दी जाएगी। इस कार्य को संभवतः तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ब्रिज का बाकी हिस्सा पूरा हो चुका है। री-डिजाइन कार्य के बाद ब्रिज का लोकार्पण कर दिया जाएगा।
सात इंजीनियर बहाल, पर क्लीनचिट नहीं
भोपाल में 90 डिग्री कोण वाले बहुचर्चित ब्रिज मामले में सरकार ने 10 माह बाद पीडब्ल्यूडी के निलंबित सात इंजीनियरों को बहाल तो कर दिया है, लेकिन किसी को भी अभी क्लीनचिट नहीं दी गई है। दो अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच पहले ही प्रारंभ हो चुकी है। बाकी पांच के बारे में शीघ्र निर्णय होगा।
विभाग ने तय किया है कि अनावश्यक रूप से जांच को लंबित रखने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। वहीं बहाली को लेकर तर्क दिया गया है कि पीडब्ल्यूडी में पहले से इंजीनियरों की कमी है। निलंबन अवधि में वेतन भी मिल ही रहा था। इसे देखते हुए लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह के प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री राकेश सिंह ने इन इंजीनियरों को केवल बहाली की मंजूरी दी।
पहले : खतरनाक 90° (वास्तविक 119°) मोड़
बाद में : सुरक्षित मोड़
रेडियस वृद्धि : +2 से 2.5 मीटर
चौड़ाई : 8.5 मीटर से 10.5-11 मीटर