भोपाल भेल प्लांट में 50 साल पुरानी मशीनों पर काम का मुद्दा प्लांट कमेटी बैठक में उठा। यूनियनों ने आधुनिकीकरण और कर्मचारियों की सुविधाओं की मांग की।
भेल भले ही आधुनिकीकरण का दावा करता हो, लेकिन कारखाने में एक दर्जन ऐसे ब्लॉक हैं, जहां 50 साल से अधिक पुरानी मशीनों पर कर्मचारी काम कर रहे हैं। भेल की यूनियनों ने इन मशीनों को बदलने या आधुनिक तकनीक के अनुसार उनका उन्नयन करने की मांग की है। यह मुद्दा भेल के स्वर्ण जयंती सभागार में कार्यपालक निदेशक प्रदीप उपाध्याय की अध्यक्षता में आयोजित प्लांट कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में उठा।
इस उच्च स्तरीय बैठक में ऑल इंडिया बीएचईएल एम्प्लॉइज यूनियन के प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं और संयंत्र के आधुनिकीकरण से जुड़े 28 से अधिक गंभीर मुद्दों को मजबूती से पटल पर रखा। यूनियन ने भेल कारखाने में तकनीकी उन्नयन और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया।
भेल प्लांट की घट रही उत्पादन क्षमता
बैठक में ऑल इंडिया भेल एम्प्लॉइज एसोसिएशन के अध्यक्ष सतेंद्र कुमार ने बताया कि पुरानी मशीनों पर काम करने से उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ पाती, जिससे कुल उत्पादन पर असर पड़ता है। इन मशीनों के कारण हर साल उत्पादन लक्ष्य समय पर हासिल नहीं हो पाते, इसलिए अब इन्हें बदला जाना चाहिए।उन्होंने बताया कि खासकर ब्लॉक-1, 2, 3, 9, फीडर्स, ट्रांसफार्मर सहित कई ऐसे विभाग हैं, जहां आज भी कर्मचारी पुरानी मशीनों पर कार्य करने को मजबूर हैं। यूनियन का सुझाव है कि इन मशीनों का अत्याधुनिकीकरण किया जाए। इसके लिए भेल प्रबंधन को भारी उद्योग मंत्रालय को प्रस्ताव भेजना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज एआई का दौर है, ऐसे में तकनीकी उन्नयन जरूरी हो गया है। इस पर ईडी उपाध्याय ने सुझाव पर अमल करने का भरोसा दिलाया है।
यूनियन प्रतिनिधियों ने रखे ये मुद्दे
- कई ब्लॉकों में मशीनें 40 से 50 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं। उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इनका उन्नयन या नई मशीनों की स्थापना अनिवार्य है।
- निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग डंप यार्ड के रूप में हो रहा है। इन स्थानों को तत्काल मुक्त कराकर नई पार्किंग विकसित की जाए।
- सेवानिवृत्ति के बाद माता-पिता की चिकित्सा सुविधा बंद करने और रेफरल मामलों में उनके साथ वार्ड आवंटन में भेदभाव, यानी केवल जनरल वार्ड देने को अनुचित बताते हुए नीति की समीक्षा की जाए।
- सुरक्षा एवं जागरूकता के तहत प्लांट के वन क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा लाइनों का विस्तार किया जाए और बढ़ती साइबर ठगी के खिलाफ कर्मचारियों के लिए वर्कशॉप आयोजित की जाएं।