Breaking News
  • भारत की लगातार दूसरी जीत, इटली पहली बार जीता, श्रीलंका 105 रन से नेपाल को हराया
  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्टों की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुंचा
  • बांग्लादेश चुनाव में हिंसा- एक की मौत, दो वोटिंग सेंटर के बाहर बम धमाके
  • चांदी आज 5,835 गिरकर 2.61 लाख किलो हुई, सोना 1,175 गिरकर1.56 लाख पर आया
  • हरिद्वार-ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस-स्कर्ट में नहीं मिलेगी एंट्री
  • बांग्लादेश में चुनाव की पूर्व संध्या पर एक और हिंदू की हत्या
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देंगी
  • बांग्लादेश में वोटिंग जारी, सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर वोटर्स की लंबी कतार
  • नई श्रम संहिता के खिलाफ देशभर में हड़ताल पर ट्रेड यूनियन, आज भारत बंद

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश

आदिवासी थे बाली, सुग्रीव, अंगद और महावीर हनुमान- उमंग सिंघार

आदिवासी थे बाली, सुग्रीव, अंगद और महावीर हनुमान- उमंग सिंघार

आदिवासी थे बाली सुग्रीव अंगद और महावीर हनुमान- उमंग सिंघार

नेता प्रतिपक्ष ने कहा- धार्मिक ग्रंथों में ऐसा दर्ज

मप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए रामायण के पात्र बाली, सुग्रीव, अंगद और महावीर हनुमान को आदिवासी बताया है। साथ ही उन्होंने दावा करते हुए कहा कि यदि भाजपा के लोग अंधभक्ति से बाहर आकर ईमानदारी से इतिहास और धर्मग्रंथों के पन्ने पलटें, तो मेरी बात को झूठ कहने का साहस नहीं कर पाएंगे। मैं हमेशा प्रमाण, इतिहास और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखता हूं, न कि अंधविश्वास या राजनीतिक सुविधा के आधार पर।

धार्मिक ग्रंथों का हवाला

सिंघार ने रामायण के पात्रों के आदिवासी होने को लेकर एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि ‘गोंड धर्म सद्विचार’ के पृष्ठ संख्या 10 पर स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के वनवास काल में जिन वानर वीरों ने उनका साथ निभाया, उनमें बाली, सुग्रीव, अंगद और महावीर हनुमान जी शामिल हैं। ये सभी आदिवासी परंपरा से जुड़े गोंड, कोल और कोरकू धर्म योद्धा थे। यह केवल मान्यता नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के धार्मिक ग्रंथों में दर्ज ऐतिहासिक तथ्य है।

वानर सेना आदिवासी परंपरा से जुड़ी है

सिंघार ने कहा कि यदि भाजपा यह मानने को तैयार नहीं है कि हनुमान जी सहित वानर सेना आदिवासी परंपरा से जुड़ी थी, तो उन्हें गोंड समाज से पूछना चाहिए कि उनके धर्मग्रंथों में क्या लिखा है। किसी समुदाय के इतिहास को नकारना केवल अज्ञानता नहीं, बल्कि उस समाज के अस्तित्व और सम्मान का अपमान है।

Related to this topic: