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एटीएस ने भिलाई-रायपुर से दो किशोर पकड़े: आईएसआई एजेंट को जानकारी भेज रहे थे

एटीएस ने भिलाई-रायपुर से दो किशोर पकड़े: आईएसआई एजेंट को जानकारी भेज रहे थे

एटीएस ने भिलाई-रायपुर से दो किशोर पकड़े आईएसआई एजेंट को जानकारी भेज रहे थे

सोशल मीडिया के जरिए छत्तीसगढ़ में अस्थिरता फैलाने की साजिश नाकाम

छत्तीसगढ़ एटीएस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एटीएस टीम ने भिलाई और रायपुर से दो किशोरों को हिरासत में लिया है, जो डिजिटल समूहों के माध्यम से पाकिस्तान तक गुप्त सूचनाएं भेज रहे थे। मामले में रायपुर एटीएस थाने में विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के तहत अपराध क्रमांक 01/25 दर्ज किया गया है।

एटीएस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) के पाकिस्तान-आधारित मॉड्यूल द्वारा भारत में अस्थिरता फैलाने और आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित करने के उद्देश्य से साइबर स्पेस में सक्रिय फर्जी और छद्म पहचान वाले सोशल मीडिया अकाउंट संचालित किए जा रहे थे।

छत्तीसगढ़ में आईएसआईएस मॉड्यूल खड़ा करने की कोशिश

दोनों आरोपियों ने कई संवेदनशील स्थानों की जानकारी पाकिस्तान भेजी। पूछताछ में बड़े नाम और अन्य संदिग्ध नंबर, चैट और विदेशी कनेक्शन भी उजागर हो सकते हैं।एटीएस अधिकारियों का कहना है कि दोनों किशोर अभी कस्टडी में हैं और पूछताछ जारी है। जांच में यह भी पता चला है कि नेटवर्क में और भी लोग जुड़े हो सकते हैं, जिन तक जल्द ही पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

हैंडलर्स द्वारा इंस्टाग्राम आईडी के माध्यम से भारतीय युवाओं और किशोरों को बरगलाने, भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने, उग्र हिंसा, कट्टरपंथीकरण और जिहादी विचारधारा का प्रसार करने के प्रयास किए जा रहे थे। किशोरों को छत्तीसगढ़ में आईएसआईएस का मॉड्यूल खड़ा करने के लिए प्रेरित किए जाने के साक्ष्य भी सामने आए हैं।

राज्य में बढ़ी चौकसी, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

इस खुलासे के बाद प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई हैं। संवेदनशील जगहों की निगरानी बढ़ा दी गई है और साइबर सेल को तकनीकी जांच के निर्देश दिए गए हैं।

नेटवर्क पिछले कुछ महीनों से सक्रिय था और किशोरों को आईएसआई हैंडलर्स द्वारा भावनात्मक रूप से प्रभावित किया जा रहा था। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान कुछ संदिग्ध चैट, फाइल शेयरिंग और लोकेशन ट्रांसफर की जानकारी सामने आई। इसके बाद निगरानी बढ़ाई गई और टीम ने दोनों किशोरों को कई महीनों तक ट्रैक कर हिरासत में लिया।

सब-मॉड्यूल तैयार करने की कोशिश

एटीएस अफसरों ने बताया कि यह मॉड्यूल केवल विचारधारा फैलाने तक सीमित नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ में अपना सक्रिय सब-मॉड्यूल तैयार करने की कोशिश में था। किशोरों को संदेशों के माध्यम से उकसाया जा रहा था कि वे प्रदेश में नेटवर्क खड़ा करें और संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखें।

छत्तीसगढ़ के संवेदनशील इलाकों, सरकारी प्रतिष्ठानों और सुरक्षात्मक गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं पाकिस्तान में बैठे आईएसआई एजेंटों को भेजी जा रही थीं। जांच में यह भी उजागर हुआ कि आईएसआई हैंडलर्स वीडियो कॉल, व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स के जरिए निर्देश देते थे। किशोरों को सूचनाओं के बदले डिजिटल भुगतान का भी लालच दिया गया था।

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