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Anuppur Elephant Terror: Fencing Broken, Crops Des

अनूपपुर में हाथियों का कहर, ग्रामीणों में दहशत का माहौल

अनूपपुर में हाथियों ने फेंसिंग दीवार तोड़ दी और खेतों में घुसकर फसलें रौंद दीं। 25 गांवों में एहतियातन बिजली बंद, ग्रामीणों में दहशत


अनूपपुर में हाथियों का कहर ग्रामीणों में दहशत का माहौल

छत्तीसगढ़ के मरवाही वनमंडल से भटककर आए हाथियों का दल अब अनूपपुर जिले में लगातार नुकसान मचा रहा है। जैतहरी वन परिक्षेत्र के धनगवां बीट में हाथियों ने न सिर्फ वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था को ध्वस्त किया, बल्कि किसानों की मेहनत पर भी पानी फेर दिया। हालात ऐसे बन गए हैं कि गांवों में रात ढलते ही डर का साया पसर जाता है।

फेंसिंग दीवार चकनाचूर, 60 मीटर लंबा हिस्सा क्षतिग्रस्त

धनगवां बीट में हाथियों ने कैम्पा रोपण क्षेत्र की करीब 60 मीटर लंबी फेंसिंग दीवार को तोड़ दिया। इस दौरान 20 खंभे भी उखड़ गए। बताया जा रहा है कि तीन हाथियों का यह दल पिछले कई दिनों से इसी इलाके में डेरा जमाए हुए है। वन अमले के मुताबिक, इतनी मजबूत फेंसिंग का इस तरह टूटना चिंता का विषय है।

खेतों में घुसकर फसलें रौंदी

हाथियों ने आसपास के खेतों में घुसकर गेहूं, मटर और मूंगफली की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया। ग्राम चोई के नत्थू राठौर, प्रेमलाल और बाबूराम सिंह की खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। वहीं कुकुरगोडा के रामप्रसाद की गेहूं और मटर की फसलें भी हाथियों की चपेट में आ गईं। कुल मिलाकर पांच किसानों की महीनों की मेहनत एक ही रात में खत्म हो गई।

विशेषज्ञों की टीम कर रही निगरानी

हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के हाथी विशेषज्ञों की एक टीम ने क्षेत्र का दौरा किया है। विशेषज्ञ हाथियों के व्यवहार का अध्ययन कर आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं, ताकि जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।

हाथियों के डर से 25 गांवों में बिजली बंद

इधर हाथियों की मौजूदगी ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। सीधी जिले के 25 गांवों में एहतियातन रात के समय बिजली आपूर्ति बंद रखने का फैसला लिया गया है। रविवार को हाथियों के मूवमेंट की पुष्टि के बाद यह कदम उठाया गया, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो।वन विभाग के एसडीओ बादशाह रावत ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। करीब 35 कर्मचारियों की टीम प्रभावित इलाकों में तैनात है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें, रात में तेज रोशनी न जलाएं और आवश्यकता पड़ने पर मोमबत्ती या सुरक्षित वैकल्पिक प्रकाश का ही उपयोग करें, ताकि हाथियों को आकर्षित करने वाली रोशनी से बचा जा सके।फिलहाल हाथियों का दल जंगल से बाहर निकलने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में वन विभाग और प्रशासन की कोशिश यही है कि हालात काबू में रहें और किसी तरह की जनहानि न हो। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि हाथियों को सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक क्षेत्र की ओर कैसे लौटाया जाए।