रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें सात दिनों के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
कोर्ट का अहम अवलोकन
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की विशेष खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जब एक ही अपराध में सभी आरोपियों पर समान भूमिका का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सभी आरोपियों के खिलाफ समान साक्ष्य मौजूद हैं, तो किसी एक को बरी करना और बाकी को दोषी ठहराना तब तक उचित नहीं है, जब तक इसके लिए अलग और ठोस कारण न दिए जाएं। इसी आधार पर अदालत ने अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद और 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने की स्थिति में 6 महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी रखा गया है।
20 साल पुराना मामला
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया था। बाद में 2007 में विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई, जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वहां से इसे पुनः सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजा गया। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी अमित जोगी की याचिका खारिज कर दी है।
अमित जोगी का पक्ष
अमित जोगी ने आरोप लगाया है कि CBI चार्जशीट के हजारों पन्नों को पढ़ने के लिए उन्हें सीमित समय दिया गया और उन्हें उचित सुनवाई का अवसर नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने CBI की अपील को तेजी से स्वीकार कर लिया, जिससे उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में असंतोष है। अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने आज माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के दो निर्णयों दिनांक 25.03.2026 (जिसमें अपील दायर करने की अनुमति दी गई) और 02.04.2026 (जिसमें अपील को स्वीकार किया गया) दोनों को एक साथ जोड़ते हुए 20.04.2026 को संयुक्त सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया।
