बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत ने अब पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। साथ ही तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने CBI के साक्ष्यों को माना आधार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने CBI द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में पर्याप्त आधार मौजूद हैं। सीबीआई ने इस केस में करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। जिसमें हत्या और साजिश से जुड़े कई अहम बिंदु शामिल थे।
अमित जोगी बोले- सुनवाई का पूरा मौका नहीं मिला
फैसले के बाद अमित जोगी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पूरी तरह से अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने इसे अप्रत्याशित बताते हुए कहा कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है।
बेटे ने कोर्ट में बताई साजिश की बात
सुनवाई के दौरान रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अदालत को बताया कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश के तहत कराई गई थी। उनके वकील ने दलील दी कि इस तरह के मामलों में सिर्फ प्रत्यक्ष सबूत ही नहीं, बल्कि पूरे षड्यंत्र को समझना जरूरी होता है।
पहले बरी हुए, अब पलटा फैसला
इस केस में ट्रायल कोर्ट ने 2007 में अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। हालांकि, इस फैसले को चुनौती दी गई और मामला दोबारा खुला। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस को फिर से हाईकोर्ट भेजा गया, जहां अब यह अहम फैसला आया है।
2003 में हुई थी हत्या
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रायपुर में NCP नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 आरोपियों को शामिल किया गया था, जिनमें से 28 को दोषी ठहराया जा चुका है। कुछ आरोपी सरकारी गवाह भी बने थे।
कौन थे रामावतार जग्गी?
रामावतार जग्गी कारोबारी पृष्ठभूमि से जुड़े नेता थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल ने कांग्रेस छोड़कर NCP जॉइन की, तो जग्गी भी उनके साथ चले गए और पार्टी में अहम भूमिका निभाने लगे।
मामले में पुलिस और CBI की भूमिका
हत्याकांड के बाद शुरुआती जांच को लेकर सवाल उठे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने मामला CBI को सौंप दिया। CBI जांच में कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए और इसी आधार पर आरोप तय किए गए।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अब इसी दिशा में आगे बढ़ेगी।