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गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में सपा–बसपा–कांग्रेस को चेहरे की तलाश

गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में सपा–बसपा–कांग्रेस को चेहरे की तलाश

अमेठी पंचायत चुनाव 2025 में सपा, बसपा और कांग्रेस मजबूत उम्मीदवार की तलाश में। जिला पंचायत अध्यक्ष पर घमासान तेज।

गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में सपा–बसपा–कांग्रेस को चेहरे की तलाश

स्वामीनाथ शुक्ला 

बीजेपी तैयार, पंचायत चुनाव की आहट से सियासत गरमाई 

 अमेठी। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मई में खत्म होना है और उससे पहले अप्रैल-मई में चुनाव होने तय माने जा रहे हैं। बोर्ड परीक्षाओं के बाद पूरा जनपद चुनावी मोड में आ जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि जहां बीजेपी पहले ही अपने दावेदारों को लेकर तैयार नज़र आ रही है, वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे सबसे अहम पद के लिए अभी तक मजबूत चेहरा तलाश नहीं कर पा रही हैं। अमेठी को गांधी परिवार का गढ़ कहा जाता है, और यहां पंचायत चुनाव हमेशा राजनीति की नई दिशा तय करते दिखते हैं। यही वजह है कि खेतों, खलिहानों, बाजारों, चाय-पान की दुकानों और चौराहों पर इस बार पहले से ज्यादा राजनीतिक चर्चा सुनाई दे रही है। 

जिला पंचायत अध्यक्ष: कुर्सी बड़ी, मुकाबला उससे भी बड़ा

अमेठी जिले में कुल 36 जिला पंचायत सदस्य हैं, और अध्यक्ष की कुर्सी इन्हीं में से चुनकर आती है। जनपद के चार विधानसभा क्षेत्र अमेठी, गौरीगंज, तिलोई और जगदीशपुर प्रत्येक में लगभग नौ सदस्य चुने जाते हैं। फिलहाल यह कुर्सी राजेश मसाला के पास है। पहले यह पद सपा के खाते में था, लेकिन 2021 में समीकरण बदले और बीजेपी ने राजेश मसाला पर दांव खेला। अब वे 2027 की तैयारी में जुटे हैं, यानी आने वाले चुनाव में समीकरण फिर बदल सकते हैं। 

सपा की मुश्किल: मजबूत चेहरा कहां से लाए?

सदर विधायक राकेश प्रताप सिंह सपा छोड़ चुके हैं। उनके जाने के बाद पार्टी के पास अध्यक्ष पद के लिए भरोसेमंद चेहरा नहीं बचा है। राकेश प्रताप सिंह के राजनीतिक सफर को देखें तो यह कुर्सी उनके लिए नई नहीं है। पहले वे जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। 2021 में उनकी पत्नी शीलम सिंह चुनाव मैदान में उतरी थीं, लेकिन उन्हें राजेश मसाला ने मात दे दी। इस बार भी माना जा रहा है कि राकेश प्रताप सिंह की नजर इस पोस्ट पर है, लेकिन पार्टी में जो खालीपन है, उसने समीकरणों को उलझा दिया है। 

कांग्रेस की दुविधा: गढ़ तो है, उम्मीदवार नहीं

अमेठी हमेशा से कांग्रेस का प्रतीकात्मक गढ़ रहा है। अब जबकि कांग्रेस के पास फिर से सांसद है, पार्टी स्थानीय निकाय चुनाव में भी ताकत दिखाना चाहती है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष बृजेंद्र शुक्ल का कहना है कि कांग्रेस पंचायत चुनाव मजबूती से लड़ेगी। जल्द ही राहुल गांधी से मिलकर रणनीति तय की जाएगी। लेकिन ज़मीनी स्थिति यह है कि कांग्रेस के पास अभी ऐसा उम्मीदवार नहीं दिख रहा, जो जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर BJP को कड़ी टक्कर दे सके।

बसपा भी चेहरे की तलाश में

बसपा की स्थिति भी सपा और कांग्रेस जैसी ही है। पार्टी अमेठी में वोटर्स तो रखती है, पर ‘सबसे मजबूत दावेदार कौन?’ इस सवाल का जवाब अब तक तय नहीं है। स्थानीय कार्यकर्ताओं की बैठकें जरूर चल रही हैं, पर अंतिम फैसला अभी दूर लगता है। 

बीजेपी सबसे आगे क्यों ?

अमेठी में बीजेपी का संगठन पिछले कुछ वर्षों में काफी काम कर रहा है। यहां जिले से लेकर पंचायत स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता हैं इन सबके कारण अध्यक्ष पद के लिए उसके पास दावेदारों की कमी नहीं है।  जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, गांवों में रोज़ नई बैठकों की चर्चा है। कहीं खेत में पानी लगाते किसान पंचायत उम्मीदवारों पर बात कर रहे हैं, तो कहीं चाय-पान की दुकान पर पुराने चुनावी किस्सों को जोड़कर नए नेता तैयार किए जा रहे हैं। पंचायत चुनाव भले स्थानीय स्तर का हो, लेकिन अमेठी में इसका असर विधानसभा और लोकसभा तक महसूस किया जाता है।