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नई एंटी-एजिंग तकनीकें

अब झुर्रियां होंगी कम और त्वचा में आएगी चमक, AIIMS भोपाल में डॉक्टरों ने सीखी एंटी-एजिंग की नई तकनीक

AIIMS भोपाल ने आयोजित की एंटी-एजिंग तकनीकों पर कार्यशाला, डॉक्टरों को मिला प्रशिक्षण। इससे त्वचा और बालों के उपचार में मिलेगी मदद।


अब झुर्रियां होंगी कम और त्वचा में आएगी चमक aiims भोपाल में डॉक्टरों ने सीखी एंटी-एजिंग की नई तकनीक

चेहरे पर बढ़ती उम्र के असर को कम करने, त्वचा में कसाव लाने और बालों से जुड़ी समस्याओं के आधुनिक उपचार की नई तकनीकों से डॉक्टरों को अपडेट करने के लिए एम्स भोपाल में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। 'स्किन रीबूट लाइव-2026' में देशभर के विशेषज्ञों ने उपचार की आधुनिक पद्धतियों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया।

कार्यशाला की खास बात यह रही कि डॉक्टरों को केवल किताबों और व्याख्यानों के माध्यम से जानकारी नहीं दी गई, बल्कि विशेषज्ञों ने उपचार की पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन कर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से चेहरे की झुर्रियों को कम करने, त्वचा में कसाव लाने और बालों से जुड़ी कई समस्याओं का बेहतर उपचार संभव है।

जरूरत के अनुसार चुनी जाएगी उपचार तकनीक

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि सौंदर्य चिकित्सा में हर मरीज के लिए एक जैसी प्रक्रिया उपयुक्त नहीं होती। मरीज की उम्र, त्वचा की स्थिति, स्वास्थ्य और समस्या को ध्यान में रखते हुए उपचार का चयन किया जाना चाहिए। डॉक्टरों को यह भी बताया गया कि उपचार के दौरान संभावित जटिलताओं से कैसे बचा जा सकता है और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता कैसे दी जाए। विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी। कार्यशाला में कम चीरा लगाने वाली आधुनिक प्रक्रियाओं, त्वचा पुनर्निर्माण और बालों के उपचार की नई तकनीकों पर विशेष चर्चा की गई।

तेजी से बढ़ रही आधुनिक सौंदर्य चिकित्सा की मांग

एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में लोग बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने और अपनी त्वचा व बालों की देखभाल के लिए आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों का नवीनतम तकनीकों से प्रशिक्षित होना बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में डॉ. सुखबीर सिंह, डॉ. रोहिणी चौहान और डॉ. अरुण भटनागर ने आधुनिक उपचार तकनीकों का प्रदर्शन किया और अपने अनुभव साझा किए, जिससे मरीजों को समय पर लाभ मिल सके।

मरीजों को मिलेगा सुरक्षित और बेहतर इलाज

एम्स भोपाल के अकादमिक अधिष्ठाता प्रो. डॉ. रजनीश जोशी ने कहा कि सौंदर्य एवं पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा का क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। इस तरह की कार्यशालाएं चिकित्सकों को नई वैज्ञानिक उपचार पद्धतियों से जोड़ती हैं, जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिलता है। कार्यशाला की अध्यक्षता बर्न एवं प्लास्टिक शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मनाल एम. खान ने की। आयोजन सचिव डॉ. अभिनव सिंह ने कार्यक्रम के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। इस अवसर पर प्रो. डॉ. विकास गुप्ता, प्रो. डॉ. रेहान उल हक, डॉ. आर.बी. सिंह और ब्रिगेडियर डॉ. राजकुमार मेहता सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

 

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