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बिना लाइसेंस दोगुने दाम में खाद बेच रहा था विक्रेता, दुकान सील, FIR दर्ज

बिना लाइसेंस दोगुने दाम में खाद बेच रहा था विक्रेता, दुकान सील, FIR दर्ज

शिवपुरी में बिना लाइसेंस दोगुने दाम पर उर्वरक बेचने वाले विक्रेता के खिलाफ कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। दुकान सील, आवश्यक वस्तु अधिनियम में FIR दर्ज हुई।

बिना लाइसेंस दोगुने दाम में खाद बेच रहा था विक्रेता दुकान सील fir दर्ज

शिवपुरीः मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के ग्राम सीहोर में किसानों को लूटने वाले एक अवैध उर्वरक विक्रेता पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। बिना लाइसेंस दुकान खोलकर शासन की तय दर से दोगुने दाम पर खाद बेचने की शिकायत सही पाए जाने पर कृषि विभाग ने दुकान सील कर दी और आरोपी के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, किसानों की शिकायत के बाद मौके पर निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि विक्रेता बिना किसी वैध लाइसेंस के उर्वरक का भंडारण कर रहा था और किसानों को मनमाने रेट पर खाद बेची जा रही थी। शिकायत मिलते ही कृषि विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुकान को सील कर दिया।

गुनी कीमत पर बिक रहा था यूरिया

सीनियर कृषि विकास अधिकारी जितेंद्र कुमार कोरकू और कृषि विस्तार अधिकारी प्रताप सिंह गरवाल को शिकायत मिलने के बाद ग्राम सीहोर में जांच की गई। निरीक्षण के समय उर्वरक विक्रेता धर्मेंद्र साहू पुत्र रामस्वरूप साहू दुकान बंद कर मौके से फरार पाया गया।

मौके पर मौजूद किसानों ने अधिकारियों को बताया कि उनसे यूरिया उर्वरक तय कीमत से कहीं अधिक दाम पर बेचा गया। किसान पवन जाटव ने बताया कि उसे दो बोरी यूरिया 950 रुपये में दी गई, जबकि किसान राजपाल सिंह गुर्जर ने कहा कि उसे 50 बोरी यूरिया 450 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से बेची गई। जबकि शासन द्वारा यूरिया की अधिकृत कीमत मात्र 266.50 रुपये प्रति बोरी तय है।

अवैध भंडारण का भी खुलासा 

जांच में यह भी सामने आया कि उर्वरक का अवैध भंडारण योगी पुत्र मातादीन योगी और भगवती प्रसाद गोस्वामी के मकान (माता मंदिर के पास) किराए पर लेकर किया जा रहा था। मौके पर उर्वरक निरीक्षक ने दोनों स्थानों को सील कर दिया।

एफआईआर दर्ज, कड़ी धाराओं में केस

पूरे मामले में कृषि विभाग की शिकायत पर पुलिस थाने में आरोपी उर्वरक विक्रेता के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा और उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश 1985 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि किसानों के शोषण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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