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'अभ्युदय मध्यप्रदेश: स्वर्णिम सप्तति का हृदयग्राही समापन

'अभ्युदय मध्यप्रदेश: स्वर्णिम सप्तति का हृदयग्राही समापन

अभ्युदय मध्यप्रदेश स्वर्णिम सप्तति का हृदयग्राही समापन

सम्राट विक्रमादित्य का महानाट्य, स्नेहा शंकर का मधुर संगीत और आकाश में 2000 ड्रोनों का अद्भुत नृत्य, उज्जवल भविष्य की झिलमिल आभा में नहाया मध्यप्रदेश।

मध्यप्रदेश ने अपने स्थापना के सप्तति वर्ष का अभ्युदय भव्यता और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर प्रदेश ने संस्कृति, जन और प्रगति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में लोककला, परंपरा, विकास और वैभवशाली इतिहास को एक सूत्र में पिरोया गया।



अलौकिक “सिंहस्थ 2028” की झलक

सोमवार की संध्या को उज्जैन के आकाश में लगभग 2000 ड्रोनों का अलौकिक नृत्य देखा गया। नीले आकाश में रोशनी से सजी ये झिलमिल आकृतियाँ “सिंहस्थ 2028” की आभा और उज्जवल भविष्य का प्रतीक बनीं।

महानाट्य- “सम्राट विक्रमादित्य : युगपुरुष का जीवन-संगीत”

मेला प्रांगण में प्रस्तुत इस भव्य नाट्यकृति ने दर्शकों को स्वर्ण युग की स्मृतियों में पहुँचा दिया। मंच पर 150 कलाकारों ने मिलकर उज्जैन के परम पराक्रमी सम्राट विक्रमादित्य के जीवन की गाथा को जीवंत किया।

स्नेहा शंकर- संगीत की सरिता में बहता भाव-सौंदर्य

संगीत जगत की ख्यात गायिका स्नेहा शंकर ने अपनी मधुर आवाज़ से संध्या को सुरों से सराबोर कर दिया। उनके गायन में ऐसी आत्मीयता और भावनात्मक गहराई थी कि पूरा वातावरण सुरमय हो उठा।

लोकनृत्यों की रंग-बिरंगी झांकी

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की लोकसंस्कृति को भी मंच मिला राई नृत्य- टीकमगढ़ के शिशुपाल सिंह और उनकी टीम द्वारा गणगौर नृत्य- सूक जोशी एवं टीम द्वारा, जो निमाड़ी जनजीवन का सुंदर चित्रण था मधाई नृत्य- सागर की स्वरले टीम द्वारा मुन्नूर नृत्य- सिवनी की पंनिया एवं साथियों द्वारा प्रस्तुति

समापन की आलोकित बेला

कार्यक्रम के अंत में उज्जैन का आसमान ड्रोन लाइट शो से जगमगा उठा। इन रोशनी की आकृतियों में “अभ्युदय मध्यप्रदेश” का भविष्य झिलमिलाता दिखा- विकास, संस्कृति और जनगौरव का उज्जवल प्रतीक।

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