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कारसेवकों की स्मृति में राम मंदिर परिसर में बनेगा स्मारक

कारसेवकों की स्मृति में राम मंदिर परिसर में बनेगा स्मारक

कारसेवकों की स्मृति में राम मंदिर परिसर में बनेगा स्मारक

विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा- मंदिर के लिए राम भक्तों ने सीने पर खाईं थी गोलियां

विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद राम मंदिर बनाने का संकल्प पूर्ण हुआ है। यह कारसेवकों के रक्त और तप का परिणाम है। आने वाले तीन महीने में राम मंदिर परिसर में उनकी स्मृति में एक सुंदर स्मारक का निर्माण कराया जाएगा।

आलोक कुमार ने बताया कि राम मंदिर के लिए असंख्य रामभक्तों ने बलिदान दिया। साल 1990 में गोलीबारी हुई, कई ने सीने पर गोली खाई। केवल कोठारी बंधु ही नहीं, उस दिन वहां पांच कारसेवक मारे गए थे।

उन्होंने बताया कि राम मंदिर के परकोटे में स्थित सप्त ऋषि मंदिरों में भगवान राम के गुरु, भक्त और मित्रों को समर्पित स्थान हैं। सप्त मंदिरों में महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज और माता शबरी के मंदिर बने हैं। भगवान राम के बाल्यकाल से लेकर उनकी शिक्षा-दीक्षा और मार्गदर्शन में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए राम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि, निषादराज, देवी अहिल्या और माता शबरी का विशाल मंदिर बनाया जाएगा।

हिंदुओं के सामर्थ्य से बना मंदिर

आलोक कुमार ने अशोक सिंघल को याद करते हुए कहा कि जब लोगों के मन में संशय था कि मंदिर प्राप्त होगा या नहीं, उस समय अशोक सिंघल ने बड़ी धनराशि खर्च करके भूमि खरीदी। कुसुमपुर की पहाड़ी से पत्थर मंगाया और पत्थर तराशने का काम शुरू कराया। कार्यशाला में काम कभी बंद नहीं हुआ। उन्हें सफलता का पूर्ण विश्वास था। उन्होंने कहा कि भारत की धर्मपरायण जनता के सामर्थ्य, पौरुष और प्रयास से ही मंदिर प्राप्त हुआ, किसी की कृपा से नहीं। जिन लोगों ने कोर्ट में मुकदमा लड़ा, उन्होंने इसे तप मानकर किया।

ध्वजारोहण और स्वदेश का बोध

आलोक कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 और विश्व हिन्दू परिषद के 61 वर्षों के सफर को एक उड़ान मिलनी चाहिए। वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट अपने काम अंग्रेजी में करते हैं, उनके कार्य अंग्रेजी सिद्धांतों पर आधारित हैं। लेकिन हमें अपने अंत:करण में झांककर देखना चाहिए कि जो स्वदेश और इस धरती के अनुकूल है, उसका बोध हमें पुनः प्राप्त करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिन्दू को हिन्दू का जीवन जीना चाहिए, अपने समाज और परिवार के साथ मूल्यों को धारण करना चाहिए और दुनिया को आनंद व सुख का मार्ग दिखाना चाहिए। ध्वज के नीचे उन्होंने यह संकल्प भी लिया।आलोक कुमार ने आगे कहा कि कुछ चीजें इतनी महत्वपूर्ण होती हैं कि उन्हें व्यक्त करना कठिन होता है। अंत:करण में संतोष और आनंद की अनुभूति होती है। काम की पूर्णता, भगवान के प्रति कृतज्ञता और निश्चय का अनुभव अत्यंत आनंददायक होता है।