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मुरैना में खेलते-खेलते चल गई बंदूक, गोली लगने से 7 साल के मासूम की मौत

मुरैना में खेलते-खेलते चल गई बंदूक, गोली लगने से 7 साल के मासूम की मौत

मुरैना में खेलते-खेलते चल गई बंदूक गोली लगने से 7 साल के मासूम की मौत

मध्यप्रदेश के मुरैना से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बच्चों का मासूम खेल एक पल में मातम में बदल गया, जब खेल-खेल में चली गोली ने एक सात साल के बच्चे की जान ले ली।

खिलोना बनी बाप की बंदूक

शनिवार रात मुरैना के पोरसा इलाके के संजय नगर में वह हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। एक ही घर में रहने वाले मकान मालिक और किराएदार के बच्चे दूसरी मंजिल पर खेल रहे थे। हंसी-मजाक के बीच अचानक गोली चलने की तेज आवाज गूंजी और सब कुछ थम सा गया।

दीवार पर टंगी राइफल बनी मौत की वजह

बताया जा रहा है कि मकान मालिक का 14 साल का बेटा कमरे में दीवार पर टंगी अपने पिता की 315 बोर लाइसेंसी राइफल उतार लाया। वह उसे खिलौने की तरह संभाल रहा था, तभी अचानक फायर हो गया।

गोली सीधे किराएदार धर्मराज सिंह तोमर के सात साल के बेटे ऋषभ तोमर के सिर में जा लगी। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

चीख-पुकार और खून से सना कमरा

गोली की आवाज सुनकर घर के लोग और पड़ोसी ऊपर की ओर दौड़े। कमरे का मंजर भयावह था—ऋषभ जमीन पर पड़ा था, सिर से खून बह रहा था। किसी को समझ नहीं आया कि बच्चों का खेल इतनी बड़ी त्रासदी में कैसे बदल गया।

पिता गार्ड, इसलिए थी लाइसेंसी राइफल

जानकारी के मुताबिक, नाबालिग का पिता प्राइवेट गार्ड है और इसी वजह से उसके पास लाइसेंसी राइफल थी। वह शुक्रवार को छुट्टी लेकर पोरसा आया था और शनिवार सुबह राइफल घर पर छोड़कर गांव चला गया। रात में इसी दौरान हादसा हो गया।

पुलिस जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राइफल जब्त कर ली। नाबालिग के पिता को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया है। वहीं मृतक ऋषभ के परिजनों ने इसे हादसा मानने से इनकार करते हुए हत्या का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि घटना किसी दूसरी राइफल से हुई और आरोपी फरार हो गया। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।थाना प्रभारी दिनेश कुशवाह के अनुसार, शुरुआती जांच में यह बच्चों के खेल के दौरान हुई फायरिंग लग रही है, लेकिन परिजनों के आरोपों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। रविवार को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

सवाल जो रह जाते हैं

यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है-क्या घर में हथियार रखना सुरक्षित है? बच्चों की पहुंच से दूर रखने की जिम्मेदारी किसकी है? एक पल की लापरवाही ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली और दो परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया।