पॉक्सो एक्ट के मामले में निरुद्ध अपने कथित प्रेमी से मुलाकात करने पहुंची किशोरी के बैग से एक-दो नहीं, बल्कि पिस्टल के 10 कारतूस बरामद हुए।
Gonda Jail: जेल में प्रेमी से मिलने पहुंची किशोरी के बैग से मिले 10 कारतूस, मचा हड़कंप |
गोण्डा: मंडलीय कारागार में जेल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। पॉक्सो एक्ट के मामले में निरुद्ध अपने कथित प्रेमी से मुलाकात करने पहुंची किशोरी के बैग से एक-दो नहीं, बल्कि पिस्टल के 10 कारतूस बरामद हुए। जेल गेट पर तलाशी के दौरान हुई इस बरामदगी के बाद हड़कंप मच गया। खास बात यह रही कि किशोरी के पास मिला आधार कार्ड भी जांच के घेरे में आ गया। उस पर दर्ज नाम और किशोरी द्वारा बताए गए नाम में अंतर मिला। जेल प्रशासन ने कारतूस और कथित फर्जी आधार कार्ड समेत किशोरी को नगर कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया।
प्रेमी से मिलने पहुंची थी प्रेमिका
जेल प्रशासन के अनुसार, नगर कोतवाली क्षेत्र के छेदीपुरवा निवासी हर्षु कश्यप पॉक्सो एक्ट के एक मामले में मंडलीय कारागार में बंद है। किशोरी उससे मुलाकात करने जेल पहुंची थी। नियमानुसार जेल के मुख्य गेट पर उसकी तलाशी ली गई। इसी दौरान बैग से पिस्टल के 10 कारतूस मिलने पर जेलकर्मियों ने उसे रोक लिया। पूछताछ शुरू हुई तो मामला सामान्य मुलाकात से कहीं अधिक गंभीर नजर आया।
दूसरा नाम क्यों? पहचान पत्र की भी होगी जांच
कारतूसों की बरामदगी के साथ ही किशोरी के पास मिले आधार कार्ड ने जांच की दिशा बदल दी। आधार कार्ड पर दर्ज नाम और किशोरी द्वारा अपना बताया गया नाम अलग-अलग था। जेल प्रशासन ने आधार कार्ड को कथित फर्जी बताते हुए पुलिस को सौंप दिया है। अब पुलिस यह जांच करेगी कि आधार कार्ड वास्तविक है या उसमें किसी स्तर पर छेड़छाड़ की गई है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि किशोरी ने जेल में मुलाकात के लिए इस पहचान पत्र का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया।
पिता का दावा, घर से बिना बताए ले गई थी कारतूस
पूछताछ में किशोरी के पिता ने पुलिस को बताया कि बरामद कारतूस उनकी लाइसेंसी पिस्टल के हैं। उनका दावा है कि बेटी कथित तौर पर इन्हें घर से बिना बताए लेकर आई थी। इस बयान के बाद पुलिस के सामने कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं। यदि कारतूस वास्तव में लाइसेंसी पिस्टल के हैं तो वे घर से कब निकले, किशोरी उन्हें लेकर जेल तक कैसे पहुंची और उन्हें अपने बैग में रखने का उद्देश्य क्या था—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी होगी।
जेल सुरक्षा पर भी उठे सवाल
मामले ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि कारतूस जेल के अंदर पहुंचने से पहले ही गेट पर तलाशी में पकड़ लिए गए, लेकिन जांच का अहम पहलू यह भी होगा कि इतनी गंभीर वस्तु लेकर कोई मुलाकाती जेल के प्रवेश द्वार तक कैसे पहुंच गई। पुलिस और जेल प्रशासन अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटे हैं।
क्या बोले पुलिस अधिकारी?
जेल अधीक्षक मृत्युंजय पांडेय ने बताया कि चेकिंग के दौरान कारतूस और कथित फर्जी आधार कार्ड बरामद हुआ। किशोरी को नगर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि किशोरी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। बरामद कारतूस, आधार कार्ड और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
क्या थी दोनों की मंशा?
अब जांच का केंद्र केवल कारतूसों की बरामदगी नहीं, बल्कि उनके स्रोत, किशोरी की मंशा, पहचान पत्र की वास्तविकता और जेल में बंद आरोपी से मुलाकात के पीछे की पूरी कहानी पर रहेगा। जांच से ही साफ होगा कि यह महज घर से कारतूस उठा लाने का मामला था या इसके पीछे कोई और कड़ी जुड़ी हुई है।