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भूख के लिए अंपायरिंग, डिप्रेशन से लड़े…संघर्ष की मिसाल है मध्य प्रदेश के Ashutosh Sharma की कहा

भूख के लिए अंपायरिंग, डिप्रेशन से लड़े…संघर्ष की मिसाल है मध्य प्रदेश के Ashutosh Sharma की कहानी...

भूख के लिए अंपायरिंग डिप्रेशन से लड़े…संघर्ष की मिसाल है मध्य प्रदेश के ashutosh sharma की कहानी

Who Is Ashutosh Sharma: जब टीम मुश्किल में हो, 40 गेंदों में 5 विकेट गिर चुके हों और 210 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य सामने हो, तो जीत की उम्मीद करना भी नामुमकिन सा लगता है। लेकिन जहां नामुमकिन खत्म होता है, वहीं से शुरू होती है आशुतोष शर्मा की कहानी। लखनऊ के खिलाफ इस युवा बल्लेबाज ने 5 छक्कों और 5 चौकों की मदद से नाबाद 66 रन बनाए और दिल्ली को जीत की दहलीज पार कराई। विप्रराज निगम के साथ महज 19 गेंदों में अर्धशतकीय साझेदारी कर उन्होंने ऐसा कमाल किया कि फैंस दंग रह गए। तो आइए जानते हैं, कैसे वह मध्य प्रदेश के एक छोटे से जिले से निकलकर आईपीएल जैसे बड़े मंच तक पहुंचे....

रतलाम से आईपीएल तक का सफर

मध्य प्रदेश के छोटे से जिले रतलाम में जन्मे आशुतोष शर्मा का क्रिकेट के प्रति जुनून बचपन से ही देखने लायक था। 15 सितंबर 1998 को जन्मे आशुतोष न सिर्फ इस खेल के शौकीन थे, बल्कि उन्होंने इसे अपना करियर बनाने का सपना भी देखा। उनके आदर्श नमन ओझा रहे हैं, जो खुद भी मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। आशुतोष की पढ़ाई-लिखाई इंदौर में हुई, और यहीं से उन्होंने अपने क्रिकेटिंग सफर की मजबूत नींव रखी। उन्होंने मध्य प्रदेश की टीम से अपना डेब्यू किया और अब अपने दमदार प्रदर्शन से आईपीएल में धमाल मचा रहे हैं।

जब कोच बना सबसे बड़ा विलेन

कहते हैं क्रिकेट में कोच गुरु की तरह होता है, लेकिन आशुतोष शर्मा की कहानी अलग थी। जहां कोच खिलाड़ी के करियर को संवारने का काम करता है, वहीं आशुतोष के मामले में चंद्रकांत पंडित खलनायक बनकर उभरे। कोलकाता नाइट राइडर्स के मौजूदा कोच चंद्रकांत पंडित जब मध्य प्रदेश टीम के हेड कोच थे, तब उन्होंने आशुतोष को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद टीम में मौका नहीं दिया। साल 2020 में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। इस झटके ने आशुतोष को तोड़ने की बजाय और मजबूत बना दिया और उन्होंने अपनी मेहनत से खुद को साबित किया।

डिप्रेशन ने घेरा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी

आज आशुतोष शर्मा को पूरी दुनिया सलाम कर रही है, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब वह सड़कों पर धक्के खा रहे थे। महज 8 साल की उम्र में, उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए घर छोड़ दिया और इंदौर आ गए। 10 साल की उम्र में पेट भरने के लिए उन्होंने छोटे-मोटे काम किए। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे। गुजारा करने के लिए उन्होंने छोटे मैचों में अंपायरिंग की और यहां तक कि लोगों के कपड़े तक धोने पड़े।

आशुतोष शर्मा के करियर में एक ऐसा दौर भी आया जब वह गहरे डिप्रेशन में चले गए। एक इंटरव्यू में उन्होंने उस कठिन समय को याद करते हुए बताया था, "मुझे क्रिकेट के मैदान पर खेलने तक नहीं दिया जाता था। धीरे-धीरे मैं डिप्रेशन में डूबता जा रहा था, लेकिन कोई यह बताने को तैयार नहीं था कि मेरी गलती क्या थी।''

लेकिन उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब पूर्व भारतीय क्रिकेटर अमय खुरसिया ने उनकी प्रतिभा पहचानी। उन्होंने आशुतोष के खेल को निखारा, जिससे उन्हें मध्य प्रदेश टीम में जगह मिली। हालांकि, कुछ कारणों से उन्हें रेलवे की टीम जॉइन करनी पड़ी जहां उन्हें नौकरी भी मिली।

इसके बाद आईपीएल ने उनकी किस्मत बदल दी। पंजाब किंग्स ने उन्हें 20 लाख में खरीदा, जहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन 2025 में उनकी तकदीर और चमकी। इस बार दिल्ली कैपिटल्स ने उन पर 3.8 करोड़ रुपये का दांव लगाया। उन्होंने पहले ही मैच में इस कीमत को अपने दमदार खेल से साबित कर दिखाया है।

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