अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA टैरिफ को गैरकानूनी बताया। मंगलवार से टैरिफ वसूली बंद होगी, 175 अरब डॉलर राजस्व पर अनिश्चितता।
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अदालत द्वारा गैरकानूनी करार दिए गए अतिरिक्त शुल्कों की वसूली अब रोकी जा रही है। अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा विभाग ने घोषणा की है कि मंगलवार से इन टैरिफ की वसूली बंद कर दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और असर
बीते शुक्रवार Supreme Court of the United States ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि Donald Trump ने व्यापक आयात शुल्क लगाने के लिए IEEPA का हवाला देकर अपने अधिकारों का उल्लंघन किया। अदालत ने निचली अदालतों के निर्णय को बरकरार रखते हुए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी बताया। यह फैसला ट्रंप के व्यापार एजेंडे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
IEEPA के तहत टैरिफ कलेक्शन बंद
US Customs and Border Protection के मुताबिक, 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ मंगलवार अमेरिकी समयानुसार रात 12:01 बजे से बंद हो जाएंगे। भारतीय समय के अनुसार यह सुबह 10:30 बजे प्रभावी होगा। विभाग ने आयातकों को निर्देश दिया है कि संबंधित ड्यूटी कोड्स को कार्गो सिस्टम से निष्क्रिय कर दिया जाए।
किन टैरिफ पर रोक, किन पर नहीं?
यह रोक केवल IEEPA के तहत लगाए गए शुल्कों पर लागू होगी। ट्रंप प्रशासन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा (धारा 232) और अनुचित व्यापार (धारा 301) के तहत लगाए गए अन्य टैरिफ जारी रहेंगे। यानी सभी आयात शुल्कों पर ब्रेक नहीं लगा है।
175 अरब डॉलर का सवाल
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 175 अरब डॉलर से अधिक के संभावित टैरिफ राजस्व पर सवाल खड़ा हो गया है। अनुमान है कि IEEPA टैरिफ से प्रतिदिन 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई हो रही थी। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वसूली गई रकम आयातकों को लौटाई जाएगी या नहीं।
धारा 122 का इस्तेमाल
रेसिप्रोकल टैरिफ रद्द होने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 122 का सहारा लेते हुए सभी देशों से आयात पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया, जिसे बाद में 15% तक बढ़ा दिया गया। इस धारा के तहत अधिकतम 15% टैरिफ 150 दिनों तक ही लगाया जा सकता है। इसके आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने धारा 122 का उपयोग नहीं किया था।