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US Claims China Secret Nuclear Test in 2020

अमेरिका का बड़ा दावा: 2020 में चीन ने छुपकर किया न्यूक्लियर टेस्ट, 6 साल में 400 हथियार बढ़ाए

अमेरिका ने दावा किया है कि चीन ने 2020 में गुपचुप परमाणु परीक्षण किया और पिछले 6 साल में अपने हथियारों की संख्या 600 से ज्यादा कर ली।


अमेरिका का बड़ा दावा 2020 में चीन ने छुपकर किया न्यूक्लियर टेस्ट 6 साल में 400 हथियार बढ़ाए

अमेरिका और चीन के बीच चल रही तनातनी अब फिर से परमाणु मोर्चे पर आ गई है। वॉशिंगटन ने बीजिंग पर गंभीर आरोप लगाया है कि उसने 2020 में चुपचाप परमाणु परीक्षण किया और अब तेजी से अपने हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। दावा यह भी है कि चीन महज़ सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका की बराबरी करने के इरादे से यह सब कर रहा है। ऐसे वक्त में जब दुनिया पहले से रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम-पूर्व की खींचतान से जूझ रही है, यह खबर नई चिंता पैदा कर रही है।

लोप नूर में हुआ था ‘सिंगल फायर’ विस्फोट

अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव क्रिस्टोफर येव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित परमाणु सम्मेलन में कहा कि 22 जून 2020 को चीन के पश्चिमी इलाके में स्थित लोप नूर के अंडरग्राउंड टेस्ट सेंटर पर 2.75 तीव्रता का विस्फोट दर्ज हुआ था। येव के मुताबिक, इस विस्फोट की जानकारी पड़ोसी कजाकिस्तान के एक मॉनिटरिंग स्टेशन से मिली थी। उन्होंने कहा कि यह सामान्य खनन (माइनिंग) विस्फोट जैसा नहीं था, बल्कि “सिंगल फायर एक्सप्लोजन” की तरह था जो परमाणु परीक्षण की पहचान मानी जाती है।चीन ने अब तक इस आरोप को खारिज किया है, और इसे बेबुनियाद बताया है। लेकिन अमेरिका का कहना है कि डेटा साफ संकेत देता है कि यह कोई साधारण गतिविधि नहीं थी।

चीन की बढ़ती परमाणु ताकत पर अमेरिकी चिंता

अमेरिका का दावा है कि 2020 से पहले चीन के पास करीब 200 परमाणु हथियार थे। अब यह संख्या 600 से ज्यादा हो चुकी है। अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा 1,000 के पार जा सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर यही रफ्तार रही, तो अगले चार-पांच सालों में चीन अमेरिका के बराबर खड़ा हो सकता है। येव ने कहा कि चीन बिना किसी अंतरराष्ट्रीय रोक-टोक के अपने परमाणु जखीरे का विस्तार कर रहा है और यह पारदर्शिता की कमी वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है।

न्यू स्टार्ट खत्म, नई हथियार दौड़ का डर

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और रूस के बीच 2010 में हुई न्यू स्टार्ट संधि अब खत्म हो चुकी है।इस समझौते के तहत दोनों देशों को अपने रणनीतिक परमाणु वारहेड्स की संख्या 1,550 तक सीमित रखनी थी। मिसाइलों और बमवर्षकों की संख्या पर भी नियंत्रण था।लेकिन इस संधि में चीन शामिल नहीं था। अमेरिका लंबे समय से चाहता था कि भविष्य की किसी भी संधि में चीन को भी शामिल किया जाए। अब जब यह समझौता खत्म हो गया है, तो हथियारों की नई दौड़ की आशंका तेज हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर तीनों बड़ी शक्तियां—अमेरिका, रूस और चीन—एक साझा ढांचे में नहीं आतीं, तो हालात 1980 के दशक जैसे हो सकते हैं।

ट्रम्प की तीन-तरफा डील की कोशिश

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल में अमेरिका, रूस और चीन के बीच तीन-तरफा परमाणु समझौते की कोशिश की थी। लेकिन चीन ने उस पहल में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। ट्रम्प ने 2020 में अमेरिका के परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने की बात भी कही थी, हालांकि बाद में साफ किया गया कि विस्फोटक परीक्षण की योजना नहीं है। गौरतलब है कि अमेरिका ने 1992 के बाद से कोई वास्तविक परमाणु परीक्षण नहीं किया है।