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US Bomb Attack On Iran Parchin Nuclear Site

मध्य एशिया युद्ध: अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट पर सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम गिराया, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

अमेरिका ने ईरान के पारचिन सैन्य परिसर के टालेगन-2 स्थल पर शक्तिशाली गैर-परमाणु बम से हमला किया। सैटेलाइट तस्वीरों में भारी नुकसान दिखा है।


मध्य एशिया युद्ध अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट पर सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम गिराया सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

अमेरिका ने हाल ही में ईरान के एक महत्वपूर्ण सैन्य स्थल पर अपना सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम गिराया है। यह बम ईरान के परमाणु हथियार बनाने की संभावित जगह पर गिराया गया। इस घटना ने युद्ध को नया मोड़ दे दिया है। यह युद्ध अब सिर्फ तेल या क्षेत्रीय ताकत का नहीं रहा, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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टालेगन-2 स्थल पर हमला

9-10 मार्च को ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में टालेगन-2 नाम की जगह पर हमला हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों में बड़े नुकसान के संकेत मिले हैं। अमेरिकी थिंक टैंक जैसे मिडलबरी इंस्टीट्यूट और इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के विशेषज्ञ डेविड अलब्राइट के अनुसार यहां जमीन में तीन बड़े छेद दिखाई दे रहे हैं।

जानें कहां है टालेगन-2

पारचिन तेहरान के पास स्थित एक बड़ा सैन्य परिसर है। टालेगन-2 इसी परिसर का एक हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां हाइड्रोडायनामिक प्रयोग हुए थे, जो परमाणु हथियारों के विकास के लिए जरूरी माने जाते हैं। यह प्रयोग यूरेनियम से जुड़े परीक्षणों के कारण चर्चा में आए थे।2018 में इजरायल ने ईरान के तथाकथित ‘अमाद प्लान’ से जुड़े करीब 55,000 दस्तावेज सार्वजनिक किए थे, जिनमें पारचिन का भी जिक्र किया गया था। हालांकि ईरान लगातार यह कहता रहा है कि यह केवल सैन्य स्थल है और इसका परमाणु कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां उच्च विस्फोटक (हाई-एक्सप्लोसिव) के प्रयोग किए गए थे, जिनका उपयोग प्लूटोनियम को दबाने वाले परीक्षणों में किया जाता है।

जीबीयू-57 बम से मिलते संकेत

विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट तस्वीरों में दिख रहे गड्ढे जीबीयू-57 ‘मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर’ बम के प्रभाव से मेल खाते हैं। यह बम जमीन के करीब 200 फीट अंदर तक घुसकर विस्फोट कर सकता है। इसे आमतौर पर गहरे भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है।यह बम इतना भारी होता है कि अधिकांश लड़ाकू विमान इसे नहीं उठा सकते। इसे केवल बी-2 स्टील्थ बॉम्बर से गिराया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार बी-2 बॉम्बर अमेरिका के मिसौरी स्थित व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से उड़ान भरकर ईरान तक पहुंचा और वापस लौटा। इस मिशन में लगभग 25,000 किलोमीटर की दूरी तय की गई।जीबीयू-57 बम को ओबामा प्रशासन के दौरान विशेष रूप से ईरान के गहरे भूमिगत परमाणु स्थलों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया था।

युद्ध का नया मोड़

विशेषज्ञों के अनुसार इस हमले के बाद युद्ध का स्वरूप बदलता दिख रहा है। पहले यह संघर्ष मुख्य रूप से तेल, क्षेत्रीय प्रभाव और राजनीतिक शक्ति को लेकर माना जा रहा था, लेकिन अब यह परमाणु कार्यक्रम को लेकर अधिक गंभीर होता जा रहा है।खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान का शासन अभी स्थिर है और उसकी सैन्य संरचना सक्रिय है। उसके 31 कमांडो समूह अभी भी काम कर रहे हैं और क्षेत्र में लगातार हमले हो रहे हैं।हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान को यह लगे कि उसकी परमाणु सुरक्षा कमजोर हो गई है, तो वह गुप्त ठिकानों पर अपने कार्यक्रम को और तेज कर सकता है। ऐसी स्थिति वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।इजरायल और कुछ पश्चिमी देशों का आकलन है कि ईरान अपेक्षाकृत कम समय में परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है। ऐसे में इस तरह के हमले ईरान की रोकथाम रणनीति को कमजोर कर सकते हैं और उसे तेजी से परमाणु हथियार कार्यक्रम आगे बढ़ाने की ओर धकेल सकते हैं।

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