अमेरिका ने भारत से आने वाले सोलर पैनलों पर 126% ड्यूटी लगाई। इंडोनेशिया 143%, लाओस 81% टैक्स के दायरे में। भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी मार्केट चुनौतीपूर्ण।
अमेरिका ने भारत से आने वाले सोलर पैनलों और सोलर सेल पर 126% की शुरुआती ड्यूटी लगा दी है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग का कहना है कि भारत अपने मैन्युफैक्चरर्स को गलत तरीके से सब्सिडी दे रहा है, जिससे अमेरिकी घरेलू कंपनियों को नुकसान हो रहा है। भारत के अलावा लाओस और इंडोनेशिया पर भी 81% से 143% तक की लेवी लगाई गई है। शुरुआती जांच के आधार पर यह फैसला लिया गया है। अंतिम फैसला 6 जुलाई को आएगा। अगर सब्सिडी की बात साबित होती है, तो यह टैक्स स्थायी रूप से लागू होगा।
अमेरिकी बाजार में भारतीय सोलर पैनल महंगे होंगे
126% ड्यूटी का मतलब है कि अब भारतीय सोलर पैनलों की कीमत अमेरिका में दोगुनी या उससे ज्यादा हो जाएगी। इसके बाद अमेरिकी खरीदार भारतीय माल की जगह लोकल कंपनियों या अन्य देशों से सोलर पैनल खरीदना पसंद करेंगे। इंडोनेशिया पर सबसे ज्यादा 143% टैक्स लगाया गया, जिससे उनका माल भी लगभग मार्केट से बाहर हो जाएगा। वहीं, लाओस पर 81% ड्यूटी है, इसलिए वहां से आने वाले पैनल भारत से थोड़े सस्ते रहेंगे।
यह नया टैक्स ट्रम्प के हाल ही में लागू किए गए 10% ग्लोबल टैरिफ से बिल्कुल अलग है और इसकी वजह से अमेरिकी सोलर इंडस्ट्री में नई चुनौती खड़ी हो गई है। ब्लूमबर्ग एनईएफ के मुताबिक 2025 की पहली छमाही में अमेरिका में कुल सोलर मॉड्यूल आयात का 57% हिस्सा भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आया था। 2024 में भारत ने अमेरिका को करीब 792.6 मिलियन डॉलर (लगभग 7,200 करोड़ रुपए) के सोलर उत्पाद भेजे थे। यह 2022 के मुकाबले लगभग 9 गुना ज्यादा था।
चीनी प्रोडक्ट को भारत-इंडोनेशिया के जरिए भेजने का आरोप
अमेरिकी कंपनियों का आरोप है कि चीनी सोलर मैन्युफैक्चरर्स अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए भारत, इंडोनेशिया और लाओस के रास्ते सस्ता माल भेज रहे हैं। पहले चीन ने वियतनाम, मलेशिया और थाईलैंड का इस्तेमाल किया था, लेकिन वहां सख्ती के बाद प्रोडक्शन भारत और अन्य एशियाई देशों में शिफ्ट कर दिया। सिटीग्रुप एनालिस्ट विक्रम बागरी का कहना है कि इतनी ऊंची ड्यूटी के बाद अमेरिकी बाजार भारतीय सोलर कंपनियों के लिए लगभग बंद हो जाएगा।
अमेरिकी कंपनियों का रुख
अमेरिकी सोलर ग्रुप 'अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड' ने वाणिज्य विभाग से सब्सिडी की जांच की अपील की थी। ग्रुप का कहना था कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग बचाने के लिए यह जरूरी था। अलायंस के वकील टिम ब्राइटबिल ने कहा कि यह फैसला अमेरिकी सोलर मार्केट में निष्पक्ष कॉम्पिटिशन बहाल करने का बड़ा कदम है। अमेरिकी कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं और यदि सस्ते विदेशी माल को बाजार में आने दिया गया तो निवेश सफल नहीं हो पाएगा।
एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी की जांच
अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट सोलर सेल पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी भी जांच रहा है। आरोप है कि भारत, इंडोनेशिया और लाओस की कंपनियां अमेरिका में लागत से भी कम कीमत पर बेच रही हैं। एंटी-डंपिंग ड्यूटी: जब कोई देश अपने माल को घरेलू बाजार से कम कीमत पर दूसरे देश में बेचता है। काउंटरवेलिंग ड्यूटी: जब सरकार सब्सिडी देती है और इससे एक्सपोर्ट कम कीमत पर जाता है। इस मामले में अंतिम फैसला जुलाई में आएगा, जो अमेरिकी और भारतीय सोलर इंडस्ट्री के लिए निर्णायक साबित होगा