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Trump Faces War Deadline Before May 1 Approval

Trump War Deadline: 1 मई से पहले मंजूरी का दबाव, ईरान तनाव के बीच बढ़ी वैश्विक चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास युद्ध जारी रखने के लिए 1 मई तक संसद की मंजूरी जरूरी। ईरान तनाव, शिपिंग अलर्ट और कूटनीतिक गतिविधियां तेज।


trump war deadline 1 मई से पहले मंजूरी का दबाव ईरान तनाव के बीच बढ़ी वैश्विक चिंता

Middle East Tension |

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। मौजूदा हालात में उनके पास युद्ध जारी रखने के लिए केवल 7 दिन का समय बचा है। अमेरिकी कानून के तहत 1 मई से पहले संसद की मंजूरी लेना अनिवार्य है, जिससे वॉशिंगटन में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

60 दिन की सीमा और संवैधानिक नियम

अमेरिका के वार पावर रेजोल्यूशन के अनुसार, राष्ट्रपति किसी भी सैन्य कार्रवाई को बिना संसदीय अनुमति के अधिकतम 60 दिनों तक जारी रख सकते हैं। इसके बाद कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ने 28 फरवरी को सैन्य कार्रवाई शुरू की, जबकि संसद को 2 मार्च को सूचित किया गया। इस गणना के आधार पर अब 1 मई की समयसीमा महत्वपूर्ण हो गई है।

कानून में 30 दिन का अतिरिक्त प्रावधान भी है, लेकिन यह केवल सैनिकों की सुरक्षित वापसी के लिए होता है, न कि युद्ध जारी रखने के लिए।

संसद में समीकरण और बढ़ती चुनौती

अमेरिकी संसद में स्थिति ट्रम्प के लिए आसान नहीं दिख रही। 100 सदस्यीय सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें हैं, जबकि कमला हैरिस से जुड़ी डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 47 सीटें हैं। हालांकि, चुनौती यह है कि ट्रम्प की अपनी पार्टी के करीब 10 सांसद भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विरोध में हैं। विपक्षी डेमोक्रेट पहले से ही एकजुट रुख अपना सकते हैं। ऐसे में मंजूरी मिलना मुश्किल हो सकता है।

क्या समयसीमा को नजरअंदाज कर सकते हैं ट्रम्प?

यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या राष्ट्रपति इस सीमा को दरकिनार कर सकते हैं। इससे पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने संवैधानिक अधिकारों का हवाला देकर इस कानून की अलग व्याख्या की है। उदाहरण के तौर पर बराक ओबामा ने 2011 में लीबिया में 60 दिन से अधिक सैन्य कार्रवाई जारी रखी थी। वहीं ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में 2019 में यमन से जुड़े प्रस्ताव को वीटो कर दिया था।

फिर भी, इस बार ऐसा कदम उठाना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है, खासकर तब जब पार्टी के भीतर ही विरोध मौजूद है।

होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग पर असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। जर्मनी की प्रमुख शिपिंग कंपनी Hapag-Lloyd ने बताया कि उसका एक जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुका है, जबकि चार अन्य जहाज अब भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं। कंपनी ने सुरक्षा हालात पर नजर बनाए रखने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव बढ़ता है तो तेल कीमतों, बीमा लागत और सप्लाई चेन पर व्यापक असर पड़ सकता है।

ईरान की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ी

इस बीच अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से फोन पर बातचीत की है। इसके अलावा उन्होंने इराक के कुर्द क्षेत्र के राष्ट्रपतिनेचिरवन इदरीस बरज़ानी से भी चर्चा की। इन वार्ताओं में क्षेत्रीय हालात और संभावित युद्धविराम पर बातचीत हुई। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान एक तरफ सैन्य तैयारी बनाए रखते हुए दूसरी तरफ कूटनीतिक प्रयासों को भी तेज कर रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव को नियंत्रित किया जा सके।

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