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खार्ग आइलैंड पर कब्जे की चर्चा

दावा: ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं, विशेषज्ञ बोले- हमला हुआ तो बढ़ सकता है वैश्विक तनाव

दावा है कि ट्रम्प प्रशासन ईरान के खार्ग आइलैंड को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यहां हमला हुआ तो वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।


दावा ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं विशेषज्ञ बोले- हमला हुआ तो बढ़ सकता है वैश्विक तनाव

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग आइलैंड की रणनीतिक अहमियत अचानक बढ़ गई है। कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिकी नेतृत्व इस आइलैंड को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। माना जाता है कि यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है, जहां से देश की अर्थव्यवस्था को बड़ी मात्रा में राजस्व मिलता है।

ईरानी तेल निर्यात की रीढ़ है खार्ग आइलैंड

खार्ग आइलैंड ईरान के तट से लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में स्थित है। यहां बड़े पैमाने पर तेल टर्मिनल, स्टोरेज टैंक और पाइपलाइन नेटवर्क मौजूद हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का करीब 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से भेजा जाता है। यहां मौजूद सुविधाओं के जरिए रोजाना लगभग 70 लाख बैरल तक तेल टैंकरों में भरा जा सकता है। 1960 के दशक में विदेशी निवेश के बाद इस क्षेत्र को बड़े ऑयल एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किया गया था। तब से यह ईरान की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था का केंद्रीय बिंदु बन चुका है।

हमला हुआ तो बढ़ सकता है वैश्विक संकट

अमेरिका स्थित थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल डोरान का कहना है कि अमेरिका पारंपरिक रूप से कुछ संवेदनशील ऊर्जा ठिकानों पर हमला करने से बचता रहा है। उनके अनुसार अगर खार्ग आइलैंड जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, तो ईरान बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय संघर्ष व्यापक अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल सकता है।

जंग के बीच भी जारी है तेल निर्यात

रिपोर्ट्स के मुताबिक हालिया सैन्य तनाव के बावजूद खार्ग आइलैंड से तेल निर्यात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनियों और सैटेलाइट डेटा से संकेत मिलता है कि यहां से टैंकर लगातार रवाना हो रहे हैं। बताया गया है कि 28 फरवरी से अब तक करीब 1.2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल टैंकरों के जरिए निर्यात किया जा चुका है। हालांकि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है क्योंकि कई जहाज अपनी ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चलते हैं।

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‘डार्क फ्लीट’ के जरिए भी भेजा जाता है तेल

ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कई बार तेल निर्यात के लिए तथाकथित “डार्क फ्लीट” का इस्तेमाल किया जाता है। ये ऐसे जहाज होते हैं जो अपनी लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर देते हैं, जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। हाल ही में एक बड़ा तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार करते समय कुछ समय के लिए ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया था और बाद में फिर दिखाई दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार यह जहाज एशियाई बाजार की ओर जा रहा था।

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